*बीमारी की जड़ का उपचार करता है आयुर्वेद*

महाकुंभनगर ।(सियासत दर्पण न्यूज़)  भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद किसी भी बीमारी के मूल कारणों का उपचार कर रोग को जड़ से नष्ट करता है जबकि एलोपैथी पद्धति बीमारी के लक्षणों का उपचार करता है उसके मूल कारणों का नहीं। उत्तराखंड के देहरादून स्थित सहस्त्रधारा की संस्था जन कल्याण सेवा आश्रम के आयुर्वेदाचार्य स्वामी महेशानंद गिरी ने महाकुंभ में झूंसी के त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर में बताया कि आयुर्वेद बीमारी के कारण का उपचार करता जिससे रोग धीरे-धीरे जड़ से समाप्त हो जाता है जबकि एलोपैथिक बीमारी के लक्षणों का उपचार करता है जिससे लोगों को तत्काल लाभ मिलता है। आजकल लोग एलोपैथिक उपचार के साथ-साथ को पीछे छोड़ वर्तमान के बेहतरी के लिए भविष्य के बारे में भी जागरूक हो रहे हैं। स्वामी महेशानंद निरंजनी अखाडे के महामंडलेश्वर भी हैं। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद असाध्य और पुरानी बीमारियों के उपचार में पूर्णतया सफल है जबकि एलोपैथ पूर्ण कारगर नहीं है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद एक वैकल्पिक समग्र चिकित्सा प्रणाली है, जो भारत में उत्पन्न अपनी तरह की सबसे पुरानी प्रणालियों में से एक है। अधिकांश आधुनिक चिकित्सा और उपचार आयुर्वेद से प्रेरणा लेते हैं। आयुर्वेदाचार्य ने बताया कि एलोपैथी चिकित्सा पद्धति संक्रमणों से निपटने में सबसे प्रभावी है, इसमें कोई शक नहीं है। मनुष्य की ज्यादातर बीमारियां खुद की उत्पन्न की हुई होती हैं। वे शरीर के अंदर उत्पन्न होते हैं। ऐसे में पुरानी बीमारियों के लिए, एलोपैथी चिकित्सा बहुत कारगर साबित नहीं है। एलोपैथी से बीमारी को सिर्फ संभाला जा सकता है। वह कभी बीमारी को जड़ से खत्म नहीं करती क्योंकि मुख्य रूप से इसमें लक्षणों का इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि शरीर में मौजूद वात, पित्त और कफ (त्रिदोष) जैसे स्थायी दोष जब तक संतुलित अवस्था में रहते हैं, तभी तक इंसान का शरीर स्वस्थ रहता है। जैसे ही इनके बीच का संतुलन बिगड़ने लगता है, मानव शरीर रोग ग्रस्त हो जाता है। यदि त्रिदोष के बीच संतुलन बनाए नहीं रखा जाता है तो शरीर के अपशिष्ट उत्पाद प्रभावी रूप से समाप्त नहीं होते हैं और ये आगे चलकर दस्त, कब्ज, अस्थमा, रुमेटीइड गठिया और ऐसी अन्य जटिलताओं को जन्म देते हैं। चरक संहिता में आयुर्वेदिक चिकित्सा के सभी पहलुओं का वर्णन है और सुश्रुत संहिता में शल्य चिकित्सा विज्ञान का वर्णन है| आयुर्वेदाचार्य ने कहा कि उभरती हुई कोई बीमारी पर तत्काल लाभ के लिए एलोपैथी में बेहतर उपचार की कोई अन्य पद्धति नहीं है। पुरानी और असाध्य बीमारियों का आयुर्वेदिक उपचार और दूसरी प्रणालियां उपचार बहुत प्रभावशाली हैं। एलोपैथिक उपचार अक्सर बहुत महंगे होते हैं जबकि आयुर्वेदिक उपचार जीवनशैली में बदलाव की अवधारणा पर आधारित हैं, जो प्रभावी है और अधिक खर्चीली नहीं है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में किसी भी बीमारी को जड़ से समाप्त करने की क्षमता है। बस रोगी में धैर्य, विश्वास, दवाइयों का सही खुराक और परहेज महत्वपूर्ण है। इनका पालन कर किसी भी असाध्य बीमारी को एक साल के भीतर ठीक किया जा सकता है। असाध्य बीमारियों में परहेज बहुत आवश्यक बताया गया है। आयुर्वेद उपचार के कई क्षेत्रों में एलोपैथी से बेहतर है। आयुर्वेद बीमारी के मूल कारण का उपचार करता है ताकि मरीज को स्थायी और सुरक्षित समाधान दिया जा सके। उसकी दवाओं में कई प्राकृतिक जड़ी-बूटियां, सब्ज़ियां और फल शामिल होते हैं जो शरीर को राहत प्रदान करते हैं। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि आयुर्वेदिक सिद्धांतों को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ना आयुर्वेद जैसे सुरक्षित, पारंपरिक और समकालीन उपचार के रूप को लोकप्रिय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आयुर्वेदिक संस्थानों और अस्पतालों को लोगों को आयुर्वेदिक प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आधुनिक समाधान और उपकरण विकसित करने की आवश्यकता है। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि किसी एक थेरेपी को अधिक वरीयता देना गलत होगा, दोनों ही थेरेपी हमारे जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि एलोपैथी तत्काल लाभ के लिए आवश्यक है जबकि आयुर्वेद का असर मंद गति से होता है और कोई दुष्प्रभाव नहीं है जबकि एलोपैथिक दवाओं में बहुत सारी रासायनिक-आधारित दवाएं शामिल होती हैं जो बीमारियों का इलाज करने और इस प्रक्रिया में गंभीर दुष्प्रभाव पैदा करने की क्षमता रखती हैं। आयुर्वेदाचार्य त्वचा का कैंसर कहे जाने वाले गंभीर बीमारी सोरायसिस का जडी बूटियों से सफल उपचार कर तमाम लोगों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचा रहे है। विदेशों से भी सोरायसिस के मरीज उपचार करवा रहे हैं। मेला क्षेत्र में स्थित सेक्टर 20 में अपने शिविर से सोरायसिस के मरीजों को निशुल्क दवा वितरित करेंगे। उन्होंने बताया कि संस्था के वरिष्ठ चिकित्सक डा रामचंद्र मिश्र, डा़ॅ धनीराम चौरसिया, डा नकुल कुमार, डॉ अतुल कुमार, डॉ वरूण कुमार, डा़ॅ कल्पना और डा़ॅ लखन लाल दुबे द्वारा सोरायसिस के रोगियों का उपचार किया जाता है।

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