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*बीज निगम की लापरवाही पड़ी भारी*

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गरियाबंद। (सियासत दर्पण न्यूज़) जरूरत के समय किसानों को समय पर जहां बीज निगम बीज उपलब्ध कराने में नाकाम रहा, तो वहीं समितियों ने किसानों को अमानक बीज थमा दिया. अब लापरवाही सामने आने पर अब समितियां अमानक बीज लेने वाले किसानों की सूची बना रही है.

देवभोग तहसील में सहकारी समितियों से पंजीकृत किसानों को समय पर मांग की अनुरूप बीज की सप्लाई करने में इस बार बीज निगम नाकाम रही है, वहीं तीन समितियों में 200 क्विंटल अमानक बीज खपा दिया. कायदे से बीज निगम द्वारा भंडारण के बाद बीज निरीक्षक को प्रत्येक समिति में भंडारित लॉट का परीक्षण करना अनिवार्य होता है. लेकिन जांच में भी देवभोग क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार किया गया.

30 जून को इलाके भर में सेंपल लिया गया था. जिसमें रोहानागुडा समिति से स्वर्णा (एमटीयू 7029), एमटीयू 1156, गोहरा पदर समिति से लिए गए स्वर्णा एमटीयू 7029 और मैनेपुर ब्लॉक से लिए गए विक्रम टीसीआर का सेंपल फेल हो गया. तीनों समिति इस किस्म के 200 क्विंटल से ज्यादा मात्रा की बीज सप्लाई हुई थी.

जांच के वक्त समितियों में 162 क्विंटल बीज मौजूद था. रिपोर्ट 2 जुलाई को आया. तब तक 50 से ज्यादा किसानों को अमानक बीज बेच दी गई थी. 2 जुलाई को रिपोर्ट जारी कर अमानक बीज ले जाने वाले किसानों की सूची बनाने कहा गया था. हालांकि, अब तक अंकुरण में किसी भी प्रकार की कोई समस्या किस शिकायत नहीं आई, पर जिम्मेदारों की बड़ी लापरवाही उजागर हो गई है.

तहसील के 8 सहकारी समितियों में 2742.30 क्विटल बीज का भंडारण कराया गया, जिसमे केवल 1789 क्विटल बीज ही वितरण हो सका. अब भी सहकारी केंद्र के गोदाम में 961 क्विंटल बीज पड़ा हुआ है. बोनी का समय 15 जून तक था ऐसे में अब बीज का उठाव नहीं के बराबर होगा. पहली बार ऐसा हुआ है कि तहसील में बीज का उठाव प्रतिशत कम रहा है.

मामले में जिला सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधक अमर सिंह ध्रुव ने कहा कि समय से पहले किस्म की मांग और मात्रा ऊपर भेजी जा रही थी. लेकिन 40 फीसदी मात्रा का भंडारण समय पर नहीं हुआ. अब समिति प्रबंधक इसकी वापसी के लिए पत्राचार कर रहे हैं, क्योंकि सीमितियों को स्थानाभाव की वजह से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करा कर मार्गदर्शन मांगा गया है.

रिकॉर्ड के मुताबिक, मई माह में पसंद के किस्मों का भंडारण मांग के अनुपात में पूर्ति एक तिहाई हुई. इलाके में किस्म 1001 और किस्म 1010 जैसे मोटा धान की बीज की ज्यादा मांग थी. किसानों के पसंद को दरकिनार कर निगम ने अपने पसंद के बीज खपाया. 15 जून तक बोनी अंतिम हो जाता है. प्री मानसून के चलते इस बार कृषि कार्य 15 दिन आगे चल रहा. जून के पहले सप्ताह में बोनी पूरी हो चुकी थी. 25 जून के बाद भी एक बड़ा खेप बीज का भंडारण किया गया, जबकि इस समय रोपा-व्यासी आरम्भ हो चुका था.

इस संबंध में उपसंचालक कृषि चंदन रॉय ने बताया कि समितिवार मांग को बीज निगम के पास भेजा जाता है. हमारी पूरी कोशिश होती है कि पूर्ति मांग के अनुरूप हो, लेकिन ऊपर से हो रही सप्लाई के आधार पर भंडारण कराने की मजबूरी है. बीज के अमानक रिपोर्ट आने के बाद बिक्री पर रोक लगाया गया है. जिन्हें वितरित किया गया था, उनकी सूची मांगी गई है. हैंडलिंग के वक्त ऊंच-नीच के चलते रिपोर्ट में अमानक आता है, पर उपज प्रभावित हो ऐसा फाल्ट नहीं पाया गया है. सभी सही अंकुरण हुआ है.

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