Home / छत्तीसगढ़ / *बज़्म-ए-अदब की पुनरागमन यात्रा: तहज़ीब, अदब और नई पीढ़ी का संगम*,, *25 वर्षों बाद हुआ आयोजन,,डॉ. शाज़िया अली की खबर*

*बज़्म-ए-अदब की पुनरागमन यात्रा: तहज़ीब, अदब और नई पीढ़ी का संगम*,, *25 वर्षों बाद हुआ आयोजन,,डॉ. शाज़िया अली की खबर*

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सियासत दर्पण न्यूज़ से बिलासपुर ब्यूरो चीफ डॉ शाज़िया अली की रिपोर्ट

बिलासपुर,, सियासत दर्पण न्यूज़,,,बिलासपुर में बज़्म-ए-अदब कमेटी द्वारा अल्लामा इक़बाल के जन्मदिवस के अवसर पर एक भव्य साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजन संपन्न हुआ, जो विश्व उर्दू दिवस की रूहानी रौशनी में नहाया हुआ था। यह आयोजन बुज़ुर्गों की दुआओं और मार्गदर्शन में नई पीढ़ी को अदब और एहतराम से जोड़ने की एक सराहनीय पहल रही।

इतिहास से वर्तमान तक की यात्रा

करीब 20–25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बज़्म-ए-अदब ने अपनी पूरी शिद्दत के साथ गंगा-जमुना तहज़ीब की यादों को ताज़ा करते हुए एक नई शुरुआत की। यह आयोजन न केवल भूली-बिसरी यादों के झरोखों से झांकता हुआ प्रतीत हुआ, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आज भी कुछ लोग इस संस्था को संवारने और सहेजने की चाहत रखते हैं।

सांस्कृतिक संदेश

इस आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि हिंदुस्तान की गंगा-जमुना तहज़ीब आज भी लोगों के दिलों में दायम क़ायम है और ताज़िन्दगी रहेगी। छत्तीसगढ़ की ज़मीन पर अदब की शमा फिर से रोशन हुई और एक रूहानी महफ़िल ने अपने पूरे हौसले के साथ उड़ान भरी।

साहित्यिक प्रस्तुतियाँ

महफ़िल में उपस्थित शायरों और कवियों ने अपनी ग़ज़लों और कविताओं से दर्शकों का दिल जीत लिया। प्रमुख प्रतिभागियों में शामिल रहे: – शमीम बिलासपुरी, एजाज़ परवेज़, डॉ. राजेश मिश्रा (GGU), सुमित शर्मा “यास”, श्री कुमार पाण्डेय, केवल कृष्ण पाठक, अनमोल सिन्हा, सागर बैस, शब्बीर जस्दान, मोहसिन अली ज़ाफरी – साथ ही मदरसों और कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने भी अपने कलाम से श्रोताओं के दिलों में गहरी छाप छोड़ी।

विशिष्ट अतिथि

कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने वाले मेहमाने ख़ुसूसी में शामिल रहे:
जनाब शेख़ अय्यूब साहब, जनाब हसन साहब (राजधानी बस), डॉ. अर्चना मिश्रा साहिबा (डिप्टी कमिश्नर, रायगढ़), जनाब खोखर साहब (पूर्व कुलपति, GGU), जनाब शमीमुल कलाम बिलासपुरी, जनाब मुबश्शिर साहब (मेज़बान होटल, रायगढ़) आदि।

सफलता के सूत्रधार

इस आयोजन को सफल बनाने में जिन लोगों ने आगे आकर इस 50–60 दशक पुरानी संस्था को पुनः सक्रिय करने की कोशिश की, उनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। विशेष योगदान देने वालों में शामिल रहे:
जनाब शेख़ अय्यूब, जनाब हसन अली साहब, सुरेंद्र कुमार वर्मा, शेख़ अब्दुल अलीम (जिनके वालिद बज़्म-ए-अदब के संस्थापक सदस्य थे), शगुफ्ता परवीन, डॉ. शाज़िया अली, सुमित शर्मा, जावेद अली, वाहिद सिद्दीक़ी, मोहम्मद शाहिद, अशफ़ाक भारमल, सुनील सिन्हा, रफत सरोश (शहज़ादा), अतहर अलीम (आदिल) आदि।

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