Home / छत्तीसगढ़ / *कांकेर जिले में मतांतरण को लेकर उपजा तनाव*

*कांकेर जिले में मतांतरण को लेकर उपजा तनाव*

3
IMG-20260612-WA0029
IMG-20260612-WA0030

रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) बस्तर संभाग के कांकेर जिले में मतांतरण को लेकर उपजा तनाव अब गांव-गांव तक फैल गया है। भानुप्रतापपुर विकासखंड के कुड़ाल गांव से शुरू हुई यह मुहिम अब जिले के 14 से अधिक गांवों तक पहुंच चुकी है।

इन गांवों की सीमाओं पर बकायदा बोर्ड लगाकर पादरियों (पास्टरों) के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। संभाग की 67% जनसंख्या आदिवासी है, जिनमें से लगभग सात प्रतिशत का मतांतरण हो चुका है।
माहरा जाति में 95% तक मतांतरण

अनुसूचित जाति की लगभग तीन लाख आबादी वाली माहरा जाति में 95% तक मतांतरण हो चुका है। यह विवाद आमाबेड़ा क्षेत्र के बड़ेतेवड़ा गांव में अंतिम संस्कार के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ के बाद और तेज हुआ है। ग्रामीणों और सरपंचों का कहना है कि यह फैसला किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि आदिवासियों को प्रलोभन देकर कराए जा रहे मतांतरण को रोकने के लिए लिया गया है। उनका तर्क है कि बाहरी हस्तक्षेप से उनके पुराने रीति-रिवाज और उनका सामाजिक ढांचा खतरे में है।

14 से अधिक गांवों में बोर्ड लग चुके हैं

वर्तमान में कुड़ाल, मुसुरपुट्टा और कोड़ेकुर्रो जैसे 14 से अधिक गांवों में बोर्ड लग चुके हैं, जबकि दर्जनों अन्य गांवों मे ऐसे ही प्रस्ताव लाने की तैयारी है। ग्राम सभाओं ने पेसा अधिनियम 1996 के तहत यह निर्णय लिया और बोर्ड लगाकर स्पष्ट किया कि गांवों में मसीही धार्मिक आयोजन वर्जित रहेंगे।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी इन ग्राम सभाओं के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना कि जबरन या प्रलोभन देकर मतांतरण रोकने के लिए लगाए गए ये बोर्ड असंवैधानिक नहीं हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति की रक्षा के लिए ग्राम सभा का एहतियाती कदम हैं।
क्या लिखा है बोर्ड पर

बोर्ड पर लिखा है कि गांव में आदिवासियों को प्रलोभन देकर मतांतरण करना हमारी संस्कृति पहचान को नुकसान पहुंचाने के साथ आदिम संस्कृति को खतरा है। अतः ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर पास्टर, पादरी एवं मतांतरित व्यक्तियों के धार्मिक आयोजन के उद्देश्य से प्रवेश पर रोक लगाते हैं।

जिले के कुड़ाल गांव में अगस्त 2025 में ग्राम सभा बुलाई गई थी। इसमें प्रस्ताव पारित कर पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर रोक का बोर्ड लगाया गया। इसके बाद ये अभियान तेजी से परवी, जनकपुर, भीरागांव, घोडागांव, जुनवानी, हवेचुर, घोटा, घोटिया, सुलंगी, टेकाठोडा, बांसला, जामगांव, चारभाठा और मुसुरपुट्टा आदि गांवों तक फैल गया।
ग्राम जामगांव में भी सामने आया मतांतरण

नरहरपुर विकासखंड के ग्राम जामगांव की जनसंख्या करीब सात हजार है। यहां 14-15 परिवारों ने अघोषित रूप से ईसाई धर्म अपना लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता गौरव राव ने आरोप लगाया कि मतांतरण के माध्यम से स्थानीय सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। एक ही धर्म के लोगों को आपस में बांटने की कोशिश की जा रही है।

चंगाई सभाओं के लिए ग्राम सभा की अनुमति नहीं ली जाती। छोटे घरों में प्रार्थना सभाएं हो रही हैं। मतांतरण के बाद नाम नहीं बदले जा रहे, जो नियम विरुद्ध है।

-गौरव राव, सामाजिक कार्यकर्ता

क्षेत्र में बढ़ते विवादों को रोकने के लिए प्रभावी कानून बनाना और उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। अन्यथा सामाजिक संघर्ष बना रहेगा।

3
IMG-20260612-WA0029
IMG-20260612-WA0030

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page