रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) और छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की नौ आवासीय कालोनियों को नगर निगम को सौंपने का निर्णय हो चुका है, लेकिन पूरी प्रक्रिया शासन स्तर से जारी होने वाली विस्तृत नियमावली पर निर्भर है। निगम प्रशासन का कहना है कि स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने के बाद ही तीनों एजेंसियां संयुक्त सर्वे कर वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगी।
सर्वे में पेयजल आपूर्ति तंत्र, सीवरेज नेटवर्क, आंतरिक सड़कों, स्ट्रीट लाइट, उद्यानों और सफाई व्यवस्था की मौजूदा हालत का तकनीकी परीक्षण किया जाएगा। प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि कई कालोनियों में 15 से 20 वर्ष पुरानी पाइपलाइन, जर्जर नालियां और खराब सड़कें बड़ी चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में हैंडओवर से पहले वित्तीय भार, अतिरिक्त स्टाफ और रखरखाव की रूपरेखा तय करना निगम के लिए अहम होगा।
पुरानी अधोसंरचना बनेगी पहली परीक्षा
अधिकांश कालोनियों में जलापूर्ति की पाइपलाइन डेढ़ दशक से अधिक पुरानी है, जिनकी उपयोग अवधि लगभग समाप्ति पर है। कई स्थानों पर लीकेज और बार-बार मरम्मत की शिकायतें हैं। ड्रेनेज सिस्टम भी कई हिस्सों में क्षतिग्रस्त है, जिससे बरसात में जलभराव की आशंका बढ़ जाती है।
आंतरिक सड़कों की परत उखड़ चुकी है और स्ट्रीट लाइट नेटवर्क आंशिक रूप से निष्क्रिय है। संयुक्त सर्वे में इन सभी बिंदुओं का तकनीकी मूल्यांकन कर मरम्मत व पुनर्निर्माण का अनुमान तैयार किया जाएगा।
बढ़ेगा निगम पर वित्तीय दबाव
हैंडओवर के बाद सफाई, प्रकाश व्यवस्था, उद्यानों के रखरखाव और सुरक्षा की जिम्मेदारी नगर निगम पर आएगी। इसके लिए अतिरिक्त सफाई कर्मी, पंप ऑपरेटर, इलेक्ट्रिशियन और गार्ड की जरूरत पड़ सकती है। नियमित मरम्मत और उन्नयन के लिए अलग बजट प्रविधान करना होगा।
निगम को संपत्ति कर और उपयोग शुल्क से आय बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन शुरुआती चरण में खर्च अधिक रहने की संभावना है।
उद्यानों और सार्वजनिक स्थलों की स्थिति
कुछ बड़ी टाउनशिप में विकसित कई पार्क उपेक्षा का शिकार हैं। घास सूख चुकी है, सिंचाई तंत्र कमजोर है और सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। बच्चों के खेल उपकरण जंग खा रहे हैं। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर चरणबद्ध सुधार कार्य शुरू किए जाएंगे।






