Home / छत्तीसगढ़ / *RTI में मांगी गई जांच रिपोर्ट पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक*

*RTI में मांगी गई जांच रिपोर्ट पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक*

3
IMG-20260612-WA0029
IMG-20260612-WA0030

बिलासपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) हाई कोर्ट ने सूचना के अधिकार और व्यक्तिगत निजता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने एक महिला पुलिस अधिकारी के खिलाफ हुई शिकायतों और उनकी जांच रिपोर्ट से जुड़े दस्तावेजों को आरटीआई के तहत सार्वजनिक करने की मांग वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

जस्टिस पीपी साहू की एकलपीठ ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि शासकीय सेवकों के विरुद्ध विभागीय शिकायतें, जांच रिपोर्ट और जांच अधिकारी की पहचान कानून के अंतर्गत संरक्षित व्यक्तिगत जानकारी है। इन्हें तब तक उजागर नहीं किया जा सकता, जब तक कि इसके पीछे कोई व्यापक जनहित सिद्ध न हो जाए। मामला बालोद जिले में पदस्थ सब इंस्पेक्टर शोभा यादव से जुड़ा है।

आरटीआई की धारा 11 का दिया हवाला

याचिकाकर्ता भेष कुमार ने आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत पुलिस विभाग से उक्त महिला अधिकारी के खिलाफ की गई शिकायतों की प्रतियां, उन पर तैयार जांच रिपोर्ट और जांच अधिकारी के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी थी। लोक सूचना अधिकारी ने आरटीआई की धारा 11 (गोपनीय तृतीय-पक्ष जानकारी) का हवाला देकर सूचना देने से इन्कार कर दिया था।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने पुलिस अधीक्षक बालोद के समक्ष प्रथम अपील और छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की। दोनों जगह से आवेदन खारिज होने के बाद उसने मुआवजे और जुर्माने की मांग के साथ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अदालत ने की आरटीआई कार्यकर्ता की याचिका खारिज

अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि पारदर्शिता का अर्थ यह कतई नहीं है कि किसी व्यक्ति के निजता के अधिकारों का हनन किया जाए। जनहित का ठोस आधार न होने के कारण हाई कोर्ट ने याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।

अदालत के प्रमुख कानूनी तर्क

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की नजीर : कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग की दलीलों और सुप्रीम कोर्ट के दो ऐतिहासिक फैसलों (सुभाष चंद्र अग्रवाल और गिरीश रामचंद्र देशपांडे मामले) को सही माना, जिसमें कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति के निजता के अधिकार की रक्षा सर्वोपरि है।

उद्देश्य बताने में विफल : हाई कोर्ट ने आरटीआई आवेदन का सूक्ष्म परीक्षण करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता यह बताने में पूरी तरह नाकाम रहा कि वह यह जानकारी किस उद्देश्य से मांग रहा है और इससे समाज का क्या हित जुड़ा है।

‌थर्ड पार्टी कंसल्टेशन अनिवार्य : कोर्ट ने रेखांकित किया कि आरटीआई की धारा 11 के तहत किसी तीसरे पक्ष की गोपनीय जानकारी साझा करने से पहले संबंधित व्यक्ति का पक्ष जानना और उसकी आपत्तियों पर विचार करना अनिवार्य है।

 

3
IMG-20260612-WA0029
IMG-20260612-WA0030

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page