रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डा. आनंद वर्गीस की पीठ ने आरडीए को आदेश दिया है कि वह पीड़ित आवंटी की दुकान में हो रहे पानी के रिसाव (सीपेज) का स्थायी निराकरण करे। पीड़ित को हुई मानसिक व आर्थिक क्षति के लिए एक लाख रुपये मुआवजा और पांच हजार रुपये कानूनी खर्च अदा करे।
राजेंद्र नगर निवासी दिलीप पृथवानी ने आरडीए के न्यू राजेंद्र नगर स्थित गोविंद सागर व्यावसायिक परिसर के भूतल पर दुकान क्रमांक एस-79 को 17 अक्टूबर 2007 को खरीदी थी। परिवादी दुकान का सालाना भू-भाटक और मेंटेनेंस शुल्क (अप्रैल 2026 तक का) नियमित रूप से चुकाता आ रहा है।
घटिया निर्माण के कारण हुआ नुकसान
आरोप है कि घटिया निर्माण के कारण दुकान लेते ही छत और दीवारों से पानी का रिसाव व सीलन शुरू हो गई। पीड़ित ने साल 2010 से लेकर 2024 तक कुल छह बार आरडीए कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिस पर आरडीए की पावती सील भी लगी हुई है। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो परेशान होकर उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया गया।
रिसाव को ठीक न करना आरडीए की लापरवाही
सुनवाई के दौरान आयोग का नोटिस मिलने के बाद आरडीए के अधिवक्ता उपस्थित तो हुए, लेकिन प्राधिकरण की ओर से कोई जवाबदावा या सफाई से जुड़े दस्तावेज पेश नहीं किए जा सके। आयोग ने पाया कि पिछले 14-16 वर्षों से लगातार शिकायत और विधिक नोटिस मिलने के बाद भी शासकीय एजेंसी द्वारा रिसाव को ठीक न करना एक गंभीर लापरवाही है। आयोग ने आरडीए के खिलाफ आंशिक रूप से परिवाद स्वीकार करते हुए यह दंडात्मक आदेश पारित किया। मामले में परिवादी की ओर से अधिवक्ता गीता पनका और अनावेदक आरडीए की ओर से अंशुल मिश्रा ने पैरवी की।






