भिलाई।(सियासत दर्पण न्यूज़) शिक्षा विभाग में गृह भाड़ा भत्ता (एचआरए) के कथित दुरुपयोग का मामला अब गंभीर वित्तीय अनियमितता के रूप में सामने आ रहा है। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) और हिंदुस्तान स्टील कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (एचएससीएल) के कुल 331 आवास शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों के नाम आवंटित पाए गए हैं। इसके बावजूद संबंधित कर्मचारियों द्वारा शासन से गृह भाड़ा भत्ता प्राप्त किए जाने की शिकायत ने विभागीय हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
मामले की शिकायत राज्य पेंशनर एवं कल्याण संघ के कोषाध्यक्ष रुद्रनारायण सिन्हा द्वारा करने के बाद संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय ने जांच प्रारंभ कर दी है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित कर्मचारी वास्तव में आवंटित आवासों में निवास कर रहे थे या नहीं तथा उन्होंने विभाग को इसकी जानकारी दी थी अथवा नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि एचआरए भुगतान किस अवधि तक किया गया और उसमें किसी प्रकार की तथ्य छिपाने की स्थिति तो नहीं रही।
अतिरिक्त भुगतान की श्रेणी में रखा जाएगा
शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का मानना है कि यदि किसी कर्मचारी को संस्थागत या नियोक्ता द्वारा उपलब्ध आवास मिला हुआ था और वह उसका उपयोग कर रहा था, तब एचआरए लेना नियमों के अनुरूप नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में प्राप्त राशि को अतिरिक्त भुगतान की श्रेणी में रखा जा सकता है।
करोड़ों रुपये की हो सकती है रिकवरी
शिकायतकर्ता रुद्रनारायण सिन्हा का अनुमान है कि यदि अधिकांश मामलों में अनियमित भुगतान की पुष्टि होती है तो वसूली की कुल राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है। इसका कारण यह है कि कई कर्मचारी वर्षों से एचआरए प्राप्त कर रहे हैं। यदि औसतन 8 हजार से 14 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से भुगतान हुआ है तो एक कर्मचारी को पांच से दस वर्ष की अवधि में लाखों रुपये का लाभ मिला होगा। सैकड़ों मामलों को जोड़ने पर राशि कई करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
जांच में किन बिंदुओं की होगी पड़ताल
जांच के दौरान आवास आवंटन रिकार्ड, वेतन बिल, एचआरए स्वीकृति दस्तावेज, सेवा पुस्तिका और कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत घोषणापत्रों का मिलान किया जाएगा। इसके अलावा बीएसपी और एचएससीएल से भी आवास आवंटन संबंधी जानकारी ली गई है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। यदि किसी कर्मचारी ने विभाग को गलत जानकारी देकर या जानकारी छिपाकर भत्ता प्राप्त किया है तो यह जांच का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
क्या हो सकती है कार्रवाई
आरोप प्रमाणित होने के बाद सबसे पहले अनियमित रूप से प्राप्त राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। सामान्यतः ऐसे मामलों में संबंधित कर्मचारी को नोटिस जारी कर राशि जमा करने का अवसर दिया जाता है। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर वेतन से किश्तों में कटौती की जा सकती है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के मामलों में पेंशन अथवा अन्य देयकों से समायोजन की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। इसके अलावा विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत कारण बताओ नोटिस, वेतनवृद्धि रोकना, प्रतिकूल प्रविष्टि, विभागीय जांच अथवा सेवा नियमों के तहत अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। यदि जांच में जानबूझकर गलत घोषणा करने या तथ्य छिपाने के प्रमाण मिलते हैं तो मामला और गंभीर रूप ले सकता है।
पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस मामले ने केवल कर्मचारियों की भूमिका ही नहीं, बल्कि भुगतान और सत्यापन व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। इतनी बड़ी संख्या में आवास आवंटन और एचआरए भुगतान एक साथ होने के बावजूद यदि समय रहते इसका परीक्षण नहीं हुआ, तो जांच का दायरा प्रशासनिक स्तर तक भी बढ़ सकता है। यही वजह है कि शिक्षा विभाग के कई कर्मचारी और अधिकारी अब जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इसके निष्कर्ष आने के बाद भिलाई क्षेत्र में एचआरए भुगतान की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जा सकती है।
जांच के बाद रिपोर्ट साैंपने को कहा
शिकायत प्राप्त होने के बाद दुर्ग संभाग के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को संबंधित प्रकरणों की विस्तृत जांच कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि जांच में कोई कर्मचारी नियमों के विपरीत संस्थागत आवास में निवास करते हुए गृह भाड़ा भत्ता प्राप्त करता पाया जाता है, तो नियमानुसार वसूली एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
— के.वी. राव, संयुक्त संचालक, शिक्षा विभाग, दुर्ग संभाग






