(सियासत दर्पण न्यूज़,)आज के इस आधुनिक दौर में जहां अमेज़न जैसी दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां करोड़ों डॉलर के जीपीएस ट्रैकिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्टफोन ऐप का इस्तेमाल करने के बावजूद डिलीवरी में गलतियां कर बैठती हैं, वहीं मुंबई के डब्बावालों ने मैनेजमेंट का एक ऐसा ऐतिहासिक और अचूक मॉडल खड़ा किया है जिस पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard) भी अपनी विस्तृत रिसर्च कर चुकी है। मुंबई की बेहद तेज रफ्तार जिंदगी और खचाखच भरी लोकल ट्रेनों की भीड़-भाड़ के बीच, बिना किसी डिजिटल तकनीक या इंटरनेट के लगभग 5,000 डब्बावाले हर दिन 2 लाख से ज्यादा टिफिन बिल्कुल सही समय पर सही इंसान तक पहुंचाते हैं। इनकी इस बेदाग और अद्भुत व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि केवल रंगों और निशानों के आधार पर काम करने वाली इस अनोखी प्रणाली में 16 मिलियन (1.6 करोड़) डिलीवरी में से केवल एक बार गलती होने की गुंजाइश होती है, जिसे फोर्ब्स ने ‘सिक्स सिग्मा’ रेटिंग से नवाजा था। दुनिया की कोई भी आधुनिक लॉजिस्टिक कंपनी आज तक सटीकता के इस शानदार स्तर को नहीं छू पाई है।
*प्रतिदिन दो लाख लोगों तक सटीक समय मे खाना पहुचाने वाला हैरतअंगेज़ सिस्टम*






