“मैंने अपनी जायदाद में से पूरी तरह इस्लामी तरीके से अपनी तीनों बेटियों को पूरा हिस्सा दिया है। बाकी मेरी जायदाद मेरी अहलिया और मेरे सिर्फ़ दो बेटों के नाम है। लेकिन इसमें से एक कनाल ज़मीन मैंने मस्जिद के लिए वक्फ कर रखी है। उस पर मस्जिद बनाई जाए। यह मेरी इच्छा है, इसे पूरा किया जाए।”
यह वसीयत मुंबई की मस्जिद बिलाल के इमाम मोहम्मद ओवैस को सुनाने के लिए मुश्ताक खान की अहलिया ने दी थी।
वसीयत सुनाने के बाद मुश्ताक खान के बड़े बेटे ने अश्कबार आँखों से कहा:
“जब मेरे वालिद की तदफ़ीन हो जाएगी, तो उसके फ़ौरन बाद इमाम मस्जिद ओवैस साहब के साथ मिलकर हम मस्जिद का संग-ए-बुनियाद रखेंगे, ताकि मेरे वालिद की वसीयत पर अमल हो सके। और यह मस्जिद मैं अपने ज़ाती पैसों से बनाऊँगा, अपने वालिद के लिए, ताकि इसका सवाब उन्हें मिलता रहे।”






