रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) 10 साल में बढ़ा वर्चुअल नंबर का चलन; लॉरेंस विश्नोई भी कर रहा इस्तेमाल गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई और अमन साव गैंग की ओर से कांग्रेसी नेता व पूर्व महापौर एजाज ढेबर के परिवार को 50 करोड़ रुपए की रंगदारी की धमकी मिली है। उन्हें वर्चुअल नंबर से मैसेज और कॉल किया गया। इसके तीन दिन बाद कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा को भी इसी तरह का मैसेज और कॉल आया। दोनों मामलों में विदेशी नंबर का इस्तेमाल किया गया।
पूर्व महापौर को जर्मनी और कुकरेजा को ब्रिटेन के नंबर से कॉल आया। दोनों नंबरों की तकनीकी जांच में पुलिस ने दिल्ली पुलिस की मदद ली। कुकरेजा को धमकी देने वाले नंबर की जांच के बाद पुलिस ने कांग्रेस से जुड़े कारोबारी शोएब ढेबर को गिरफ्तार किया है, जबकि पूर्व महापौर को धमकी देने वाले आरोपी का अब तक पता नहीं चला है। डीसीपी तारकेश्वर पटेल ने बताया कि पहला मामला कोतवाली और दूसरा तेलीबांधा थाने का है। दोनों मामलों की जांच की जा रही है। दोनों में वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल हुआ है।
ऐसे नंबरों को ट्रेस करने में तकनीकी दिक्कत आती है, क्योंकि कॉल करने वाले की पहचान और लोकेशन सीधे सामने नहीं आती। वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल वाट्सएप, टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग एप्लीकेशन में भी किया जा रहा है।
वर्चुअल नंबर में सिम की जरूरत नहीं
वर्चुअल नंबर सामान्य मोबाइल नंबर से अलग होता है। इसमें फोन में सिम कार्ड लगाने की जरूरत नहीं होती। यह इंटरनेट या क्लाउड टेलीफोनी सेवा के जरिए संचालित होता है। पुलिस के मुताबिक ऐसे नंबर उपलब्ध कराने वाले दर्जनों एप हैं। अधिकांश सेवाओं में भुगतान के बाद मनचाहे देश का नंबर लिया जा सकता है। कुछ सेवाओं में ईमेल की जरूरत होती है, जबकि दस्तावेज या KYC की शर्त सेवा और संबंधित देश के नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
फोन आए तो ऐसे पहचानें वर्चुअल नंबर
किसी नंबर के कोड से उसके देश का पता चल सकता है। जैसे +1, +44 और +971 विदेशी नंबरों के कोड हैं, जबकि भारत का कंट्री कोड +91 है। नंबर-लुकअप सेवाओं में VoIP या Virtual जैसी जानकारी मिल सकती है, लेकिन इसे अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। अनजान विदेशी नंबर से धमकी या संदिग्ध कॉल आए तो कॉल-बैक न करें। कॉल की रिकॉर्डिंग, स्क्रीनशॉट और नंबर सुरक्षित रखें और पुलिस या साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत करें।
साइबर क्राइम एक्सपर्ट मुकेश चौधरी से सीधी बात
10 साल में बढ़ा चलन, अब क्राइम में इस्तेमाल
वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल इंटरनेट या क्लाउड टेलीफोन के जरिए होता है। इसका व्यावसायिक उपयोग भी किया जाता है। कई कंपनियां अलग-अलग देशों में कारोबार करती हैं और संचार के लिए इन सेवाओं का इस्तेमाल करती हैं। पिछले 10 साल में वर्चुअल नंबर का चलन बढ़ा है। अब इसका उपयोग क्राइम में भी होने लगा है।
धमकी, रंगदारी और साइबर ठगी में अपराधी पहचान छिपाने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इससे डिजिटल पहचान पूरी तरह खत्म नहीं होती। जांच में सबसे पहले नंबर के सेवा प्रदाता और उसके उपयोग का समय पता किया जाता है। इसके बाद उपलब्ध अकाउंट डिटेल, IP लॉग, लॉग-इन गतिविधि, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित डिवाइस के डेटा को आपस में मिलाया जाता है। कॉल के समय और IP की टाइमलाइन के मिलान से जांच को दिशा मिलती है। विदेशी प्रदाता होने पर रिकॉर्ड हासिल करने के लिए कानूनी-अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है।






