सरगुजा/सूरजपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में मां-बेटी हत्याकांड केस में स्पेशल कोर्ट ने आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है। अब मुख्य आरोपी कुलदीप साहू को शनिवार को रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया गया है।
सूरजपुर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 8 अक्टूबर को चारों आरोपियों को हत्या, रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत दोहरे मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई थी। अंबिकापुर सेंट्रल जेल में फांसी देने की व्यवस्था नहीं होने के कारण तीनों को रायपुर सेंट्रल जेल भेजा गया है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, मामला 14 अक्टूबर 2024 का है। आरोपियों ने मारपीट का बदला लेने हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी और बेटी की हत्या कर दी थी। वारदात से पहले हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी से रेप किया गया। इसके बाद चाकू से उसकी हत्या कर दी गई। आरोपियों ने बेटी की भी धारदार हथियार से हत्या कर दी। दोनों के शव घर से करीब 5 किलोमीटर दूर फेंक दिए गए थे।
कोर्ट बोला- आरोपी पर पश्चाताप नहीं दिखा
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 288 पेज के फैसले में कहा कि, मां-बेटी के साथ अमानवीय, नृशंस और विभत्स अपराध अक्षम्य है। मुख्य आरोपी कुलदीप सिंह के कोर्ट से बाहर निकलते हुए ‘स्माइली गैस्चर’ पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी पर पश्चाताप नहीं दिखा और वह समाज में वापस लौटने लायक नहीं है।
कड़ी सुरक्षा के बीच रायपुर सेंट्रल जेल भेजे गए
फांसी की सजा के बाद मुख्य आरोपी कुलदीप साहू को शनिवार सुबह अंबिकापुर सेंट्रल जेल से कड़ी सुरक्षा के बाद रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया। उसे सुबह अंबिकापुर सेंट्रल जेल से प्रक्रिया पूरी कर सुबह 6 बजे रवाना किया गया। दोपहर 12 बजे उसकी आमद रायपुर सेंट्रल जेल में दर्ज कर ली गई।
जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत ने बताया कि, कुलदीप साहू के अंबिकापुर सेंट्रल जेल में निरूद्ध रहने की अवधि में उसके खिलाफ तीन जेल अपराध दर्ज किए गए हैं। फांसी की सजा होने के बाद उसपर 24 घंटे कड़ी निगरानी रखी जा रही थी।
जेल अधीक्षक ने बताया कि फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद उसका व्यवहार मिश्रित था। रायपुर सेंट्रल जेल में जेल नियमों के आधार पर तीनों को कड़ी सुरक्षा में रखा जाएगा। सजा पाने के बाद कुलदीप साहू का व्यवहार मिश्रित था। उसे कानूनी जानकारियां हैं।
संभवतः उसे सुप्रीम कोर्ट में अपील के बाद राहत मिलने की उम्मीद थी। आगे की कार्रवाई हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के आधार पर की जाएगी।
सबूतों से सामने आया घटनाक्रम, डीएनए टेस्ट से अहम सबूत
13 अक्टूबर 2024 की रात हुए नृशंस हत्याकांड का कोई प्रत्यक्षदशी गवाह नहीं मिला। घटनास्थल के परिस्थितिजन्य साक्ष्य औक फॉरेंसिक जांच के साथ ही डीएन टेस्ट से हत्याकांड में तीन आरोपियों ने हेड कॉन्स्टेबल के घर में घुसकर वारदात की पुष्टि की।
पुलिस की ओर से पेश सभी साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने माना कि मुख्य आरोपी कुलदीप साहू सहित चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह दरवाजा तोड़कर हेड कॉन्स्टेबल के घर घुसे थे। मुख्य आरोपी कुलदीप साहू ने हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी से रेप किया।
डीएनए रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। दो अन्य आरोपियों की ओर से रेप किए जाने के फारेंसिक सबूत मिले हैं। आरोपियों ने हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी पर चाकू से 33 और बेटी पर 28 बार वार किया। नाबालिग के साथ यौन हिंसा के सबूत नहीं मिले।
सबूतों के आधार पर बताया गया है कि जब दोनों को निर्वस्त्र अवस्था में कार में डाला गया तब तक वे जिंदा थे। दोनों को आरोपियों ने पीढ़ा में खेत के किनारे फेंक दिया था। दोनों का शव 14 अक्टूबर की सुबह मिला था।
वारदात के दौरान चौथा आरोपी आर्यन विश्वकर्मा हत्या के दौरान घर में नहीं घुसा था। उसने सूरजपुर के आरक्षक पर खौलता तेल डाला था और हत्या के बाद सबूतों से छेड़छाड़ में मदद की थी।
पुलिस परिवार ने मनाई दिवाली
कोर्ट का फैसला आते ही हेड कॉन्स्टेबल और उसके परिजन भावुक हो गए। हेड कॉन्स्टेबल के भाई का कहना था कि हम कोर्ट के फैसले से संतुष्ट हैं, इसी फैसले की हमें उम्मीद थी। घटना के बाद से छोटा भाई टूट चुका था, उसे पूरे परिवार वालों ने संभाला। दोषी अब आगे कोर्ट की ओर रूख करेंगे तो हम भी अपना पक्ष रखेंगे। लास्ट तक हम पूरी कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
फास्ट ट्रेक कोर्ट की ओर से तीन आरोपियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद 9 अक्टूबर की रात पुलिस परिवार ने दिवाली मनाई। पुलिस परिवार ने दीपक जलाया और पटाखे फोड़े। पुलिस परिवार के सदस्यों के साथ हुए नृशंस हत्याकांड में आए फैसले ने पुलिस परिवारों को बड़ी राहत दी है।
हत्या के पीछे क्या थी वजह
दरअसल, 9 अक्टूबर 2024 की रात शहनाज अख्तर का जगराता कार्यक्रम था। इस दौरान हत्याकांड के मुख्य आरोपी कुलदीप साहू के भाई संदीप साहू का नवापारा के कुछ युवकों से विवाद हो गया था। 2 दिन बाद पुलिस संदीप साहू को भाजपा नेताओं के दबाव में उठाकर ले गई। आरोप है कि थाने में उसके साथ बेदम मारपीट की गई।
बताया गया कि संदीप साहू के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। इस घटना को लेकर कुलदीप साहू नाराज था। उसने अपने भाई के साथ मारपीट करने वालों को निशाना बनाया। इनमें वह पुलिसकर्मी भी शामिल था, जिसकी पत्नी और बेटी की हत्या की गई। पुलिसकर्मी से कुलदीप का पुराना विवाद भी था।






