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*मौसमी चटर्जी जी के पिता ने साफ कह दिया था कि मौसमी फिल्मों में काम नहीं करेंगी।’पढ़े पूरी रिपोर्ट*

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सियासत दर्पण न्यूज़,मौसमी चटर्जी के दादा ब्रिटिशकाल में जज थे। इनके पिता भी सेना में नौकरी किया करते थे। बाद में वो रेलवे में आ गए। डायरेक्टर तरुण मजूमदार का घर और स्टूडियो मौसमी चटर्जी के स्कूल के पास ही था। वो मौसमी को जानते थे। एक दफा उन्होंने मौसमी को एक फिल्म ऑफर की। ये बात जब मौसमी जी के पिता को मालूम हुई तो उन्होंने साफ कह दिया कि मौसमी फिल्मों में काम नहीं करेंगी। लेकिन फिर तरुण मजूदमदार की पत्नी और एक्ट्रेस संध्या रॉय ने मौसमी जी के पिता से बात की और उन्हें मौसमी जी को फिल्मों में काम करने की छूट देने के लिए मना लिया।

संध्या रॉय ने मौसमी के पिता को दो हज़ार रुपए एडवांस देने की पेशकश की। लेकिन मौसमी जी के पिता ने वो रुपए लेने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा,”ये रुपए तुम ही रखो। तुम्हें उसका नखरा भी उठाना पड़ेगा। तब ये रुपए तुम्हारे काम आएंगे।” इस तरह मौसमी चटर्जी ने अपनी पहली फिल्म साइन की। वो थी 1967 में आई बांग्ला भाषी फिल्म बालिका बधू। और मौसमी चटर्जी के हीरो थे पार्थ मुखर्जी। आज मौसमी चटर्जी का जन्मदिन है।

26 अप्रैल 1955 को कलकत्ता में मौसमी चटर्जी का जन्म हुआ था। मौसमी जी के पिता ने संध्या रॉय से जो कहा था वो सच साबित हुआ। मौसमी चटर्जी ने शूटिंग के वक्त इतने नखरे किए कि एक वक्त वो आया जब तरुण मजूमदार चिढ़कर बोले,”मैं इस फिल्म को बनाउंगा ही नहीं। अब तक जो भी शूटिंग मैंने की है मैं उसकी रील्स को जला दूंगा।” हालांकि उनकी पत्नी संध्या रॉय ने किसी तरह उनको संभाला। संध्या रॉय ने ही मौसमी चटर्जी को भी कंट्रोल किया। अगर संध्या रॉय ना होती तो शायद बालिका बधू कभी बनती भी नहीं। ये बात खुद मौसमी चटर्जी जी ने एक इंटरव्यू में कही थी।

मौसमी बहुत छोटी थी जब उन्होंने अपनी पहली फिल्म में काम किया था। वो महज़ पांचवी क्लास में थी। इसलिए उनको बड़ी दिखाने के लिए उनका काफी मेकअप किया जाता था। और उन्हें बड़ी लड़कियों जैसे कपड़े पहनाए जाते थे। मौसमी को इस सबसे बड़ी चिढ़ होती थी। ऐसा दो दफा हुआ था जब मौसमी चटर्जी मेकअप रूम से चुपके से भाग गई थी। वैसे, यहां ये बात भी बतानी ज़रूरी है कि मौसमी जी का असल नाम इंदिरा है। लेकिन जब वो पहली फिल्म में काम कर रही थी तब उनकी बड़ी बहन ने उन्हें मौसमी नाम दिया था।

बालिका बधू की शूटिंग के दौरान ही मौसमी चटर्जी की पहली मुलाकात हुई थी हेमंत कुमार से। हेमंत कुमार जी बालिका बधू के संगीतकार थे। उस वक्त मौसमी चटर्जी नहीं जानती थी कि हेमंत कुमार भविष्य में उनके ससुर होंगे। जी हां, मौसमी चटर्जी की शादी हेमंत कुमार जी के बेटे जयंत मुखर्जी से हुई है। बालिका बधू बहुत बढ़िया चली थी। मौसमी चटर्जी को छोटी उम्र में ही ख्याति मिल गई थी। मौसमी इतनी मशहूर हो गई थी कि लोग उन्हें देखकर भीड़ लगा लेते थे।

संगीतकार हेमंत कुमार ने एक दिन मौसमी जी के पिता से कहा,”मैं मौसमी को अपने साथ मुंबई ले जाना चाहता हूं। मुंबई में भी हम बड़ी धूमधाम से दुर्गा पूजा आयोजित करते हैं। अब कलकत्ता में अगर मौसमी किसी दुर्गा पूजा में जाएगी तो वहां लोग इसे पहचान लेंगे। लेकिन मुंबई में इसे अभी कोई नहीं जानता।” मौसमी के पिता राज़ी हो गए। लेकिन एक बंगाली मैगज़ीन ने इस दौरान एक आर्टिकल पब्लिश कर दिया जिसमें दावा किया गया कि मौसमी चटर्जी को हेमंत कुमार के घर अक्सर देखा जाता है। मौसमी की शादी हेमंत कुमार के बेटे जयंत से हो सकती है।

उस मैगज़ीन में छपा वो आर्टिकल मौसमी चटर्जी के रिश्तेदारों ने भी पढ़़ा। मौसमी के पिता की एक आंटी थी। उन तक भी वो आर्टिकल पहुंचा। वो उस आर्टिकल को पढ़कर बड़ा नाराज़ हुई। और उनकी नाराज़गी उस वक्त और कई गुना बढ़ गई जब उन्हें पता चला कि मौसमी के पिता मौसमी को हेमंत कुमार के साथ मुंबई भेज रहे हैं। उन्होंने मौसमी के पिता को खूब डांटा। और कहा कि तुम अपनी बेटी को कैसे मुंबई भेज सकते हो। उसकी तो अभी शादी भी नहीं हुई है। ये बात जब हेमंत कुमार को पता चली तो उनसे रहा नहीं गया। वो मौसमी के घर आए और उन्होंने कहा,”इंदू(मौसमी) मेरी बहू बनेगी। अब ये बातें सच ही होने दीजिए।” मौसमी जी के पिता को भी कोई ऐतराज़ नहीं था। सो, मुंबई आने से पहले ही मौसमी चटर्जी और जयंत मुखर्जी की शादी हो गई।

इस तरह हेमंत कुमार की बहू बनकर मौसमी चटर्जी पहली दफा मुंबई आई थी। और कलकत्ता से मौसमी अपने साथ अपना कुत्ता, अपनी गुड़िया और अपनी एक बेस्ट फ्रेंड को साथ लाई थी। इनकी वो बेस्ट फ्रेंड लगभग एक साल तक मुंबई में इनके साथ रही थी। हेमंत कुमार जी ने शादी के बाद मौसमी जी से पूछा था कि क्या तुम अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती हो। लेकिन मौसमी जी ने मना कर दिया। क्योंकि पढ़ाई में इनका कुछ खास मन नहीं लगता था। मौसमी चटर्जी की पहली हिंदी फिल्म थी शक्ति सामंत की अनुराग जो साल 1972 में रिलीज़ हुई थी। ये फिल्म मौसमी ने तब साइन की थी जब उन्होंने जयंत मुखर्जी से सगाई की थी।

शक्ति सामंत को ये नहीं पता था कि मौसमी इतनी जल्दी शादी भी कर लेंगी। मौसमी ने जब अनुराग की शूटिंग शुरू कर दी थी उसके कुछ दिन बाद शक्ति सामंत को पता चला कि मौसमी ने तो शादी भी कर ली है। वो इस बात से बड़ा खफा हुए। क्योंकि उन्हें नहीं लग रहा था कि एक शादीशुदा एक्ट्रेस सही से फिल्म में काम कर सकेगी या नहीं। उनका ये भी मानना था कि शादीशुदा एक्ट्रेस हीरोइन के किरदारों में सफल नहीं हो पाती हैं। लेकिन शक्ति सामंत का ऐसा सोचना एकदम गलत साबति हुआ। अनुराग रिलीज़ हुई और बहुत बड़ी हिट साबित हुई। हिंदी फिल्मों में मौसमी चटर्जी के पहले हीरो रहे विनोद मेहरा।

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