(सियासत दर्पण न्यूज़) रायपुर शहर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होते ही कानून-व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एमजी रोड से लेकर शराब दुकानों, अहातों और मरीन ड्राइव तक शायद ही कोई ऐसा इलाका बचा हो, जहां पुलिस की सख्त और सक्रिय मौजूदगी नजर न आ रही हो।
लगातार बढ़ी निगरानी और कार्रवाई से अपराधियों में खौफ और आम जनता में भरोसे का माहौल बनता दिख रहा है। कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद नशे के कारोबारियों, नियमों की आड़ में शराब बेचने वालों और छोटे-बड़े अपराधियों के लिए शहर की सड़कें आसान नहीं रहीं।
लगातार पेट्रोलिंग, औचक चेकिंग और ताबड़तोड़ कार्रवाई ने असामाजिक तत्वों को बैकफुट पर ला दिया है। जिन इलाकों को कभी नशेड़ियों का सुरक्षित अड्डा माना जाता था, वहा अब पहुंचने से पहले सौ बार सोचना पड़ रहा है।
शाम ढलते ही जब बाइक्स पर सवार जवान अधिकारी, हाथों में डंडा लिए सड़कों पर निकलते हैं, तो अच्छे-अच्छे बदमाशों के पसीने छूट जाते हैं। यह नजारा अब रोजमर्रा का हो गया है, जो साफ संदेश देता है कि रायपुर में कानून से ऊपर कोई नहीं।
पुलिस की इस सख्ती का सबसे बड़ा फायदा आम जनता को मिल रहा है। परिवार के साथ नाइटलाइफ का आनंद लेने वाले नागरिक, मरीन ड्राइव पर टहलने वाले लोग, स्टेडियम और गार्डन के आसपास घूमने वाले युवा सब खुद को पहले से कहीं ज़्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
रात में बाहर निकलने वाले नागरिकों का कहना है कि पहले जहां अंधेरा होते ही सड़कें सुनसान हो जाती थीं, अब हर दूसरे-तीसरे चौराहे पर हथियारों से लैस पुलिसकर्मी नजर आते हैं। यह मौजूदगी लोगों के लिए डर नहीं, बल्कि सुरक्षा की एक नई रोशनी बनकर सामने आई है।
शहरवासियों का मानना है कि कमिश्नरेट सिस्टम की शुरुआत ही इतनी सख्त और प्रभावी है, तो जब यह अपने पूरे स्वरूप में लागू होगा, तब रायपुर को और बेहतर कानून व्यवस्था के साथ एक सुरक्षित शहर के रूप में नई पहचान मिलेगी।







