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*रि-ओपन हुआ रायपुर सेंट्रल जेल का कैफे*

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रायपुर । (सियासत दर्पण न्यूज़) रायपुर सेंट्रल जेल एडमिनिस्ट्रेशन नए टैलेंट को मौका देने के लिए जल्द ही ओपन माइक प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है। जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने बताया कि अगले महीने के अंत तक जेल कैफे में ओपन माइक शुरू किया जाएगा। इसमें यंग टैलेंट को परफार्म करने का मौका मिलेगा।

इसके लिए कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। इसके अलावा जेल में कैदियों के हाथ से बनाए जाने वाले चार तरह के स्नैक्स (नमकीन/मिक्चर) को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI का अप्रुवल भी मिल गया है। ये चारों किसी ब्रांड प्रोडक्ट्स की तरह नई पैकेजिंग के साथ ग्राहकों को प्रोवाइड किए जा रहे हैं।

इन नमकीन को पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों और मंत्रियों को लंच में भी परोसा गया था। दरअसल, लगभग छह महीने तक जेल की कैफे रिनोवेशेन के नाम पर छह महीने तक बंद थी। इसे हाल ही में नए कलेवर के साथ रि-ओपन किया गया है।

ये कैंटीन दो पाली में चलती है। सुबह 7 बजे से दोपहर 12-12:30 बजे तक। और दोपहर 3 बजे से शाम 6:30 बजे तक। एक दिन में औसतन बिक्री की बात की जाए तो करीब 600 से ज्यादा समोसे और 300 से ज्यादा प्लेट मुंगबड़े की ब्रिकी होती है।

इसके साथ जलेबी की भी बड़ी डिमांड रहती है। ब्रांड बनने के बाद नमकीन के पैकेट्स की डिमांड भी बढ़ी है, रोज 300 से अधिक पैकेट तैयार किए जाते हैं। इससे पहले ये खुले में बिकते थे।

अधीक्षक क्षत्री ने बताया जेल में कैफे रन करने के पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला कैदियों का स्किल डेवलपेंट और उन्हें अच्छे व्यवहार के लिए मोटिवेट करना। दरअसल, जेल के बाहर निकलने के बाद कैदी अपना सेल्फ फाइनेंस डेवलेप कर सके, इसके लिए उन्हें कई तरह के काम सिखाए जाते हैं।

इनमें से एक काम फूड मेकिंग भी है। जो कैदी जेल में अच्छा आचरण करते हैं, उन्हें एक स्टेप आगे बढ़कर सोसाइटी से जुड़े रहने का मौका भी दिया जाता है। स्पेशल परमिशन लेने के बाद इन कैदियों को जेल के बाहर भी कुछ वक्त मिल जाता है। ऐसे में दूसरे कैदी भी इन्हें देखकर मोटिवेट होते हैं।

इसके अलावा सोसाइटी का परसेप्शन बदलने में कैंटीन मददगार है। ये कैंटिन इकलौता जरिया है, जहां बाहरी लोग और कैदी रोज आपस में जुड़ सकते हैं। इससे एक पहचान बनती है कि बंदी भी सक्षम हैं। वो भी किसी यूनिट को पूरी जिम्मेदारी से संभाल सकते हैं।

कैंटिन के जरिए समाज को ये मैसेज देना है कि जेल में रहने वाला व्यक्ति भी सुधरकर समाज का हिस्सा बन सकता है।

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