Home / राजधानी / *‘मोर गांव-मोर पानी’ में 30% काम अधूरा*

*‘मोर गांव-मोर पानी’ में 30% काम अधूरा*

3
IMG-20260612-WA0029
IMG-20260612-WA0030

रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़)  प्रदेश में जल संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर चल रही मुहिम के बावजूद लक्ष्य का 30 प्रतिशत काम अब भी अधूरा है। ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के तहत 1.03 लाख से अधिक जल संरक्षण कार्यों पर अब तक 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं, जबकि 70 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है।

24 अप्रैल 2025 से प्रारंभ ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के माध्यम से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के बाद विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी (वीबी-जी राम जी) के तहत प्रदेशभर में जल संरक्षण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन को एकसाथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

अभियान के अंतर्गत 1,03,651 जल संरक्षण व संवर्धन संबंधी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण कार्य चल रहा है। अधिकारियों का दावा है कि इन कार्यों से जल सुरक्षा मजबूत हो रही है, वहीं प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है, जिनमें 57 प्रतिशत महिलाएं हैं।

वर्तमान में समाज के कमजोर वर्गों की निजी भूमियों पर 13,065 आजीविका डबरियों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इससे ग्रामीण परिवारों को मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़कर अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत 624 सामुदायिक तालाब विकसित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण अंतर्गत निर्मित 1.50 लाख से अधिक आवास में हितग्राहियों द्वारा स्वेच्छा से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है।

‘कैच द रेन’ योजना के लिए मासिक लक्ष्य की तैयारी

प्रदेश में जल संरक्षण और भूजल प्रबंधन के प्रयासों से भूजल की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ है। भूजल संसाधन आकलन-2026 में प्रदेश का एक भी विकासखंड भूजल दोहन की ‘क्रिटिकल’ (संकटकालीन) श्रेणी में नहीं है। वर्ष 2020 में नौ और 2025 में पांच विकासखंड इस श्रेणी में थे। इस वर्ष बालोद जिले का गुरूर, बेमेतरा जिले का नवागढ़, बेमेतरा, बेरला और रायपुर जिले का धरसींवा बाहर आ गए हैं। 12 विकासखंडों की भूजल स्थिति में सुधार हुआ है और सुरक्षित विकासखंडों की संख्या बढ़कर 127 हो गई है।

राज्य सरकार का लक्ष्य अब 11 जिलों के 19 अर्ध-संकटग्रस्त विकासखंडों पर है। राज्य सरकार ने अब इस उपलब्धि को अगले चरण में ले जाते हुए वार्षिक ‘कैच द रेन’ योजना 2026-27 को विकासखंड स्तर के मासिक लक्ष्यों के साथ लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश में वार्षिक भूजल रिचार्ज 11.57 से बढ़कर 14.65 बिलियन घन मीटर (बीसीएम) हो गया है।
जिलों में जल संबंधित कार्यों की स्वीकृति (24 अप्रैल 2025 से 31 सितंबर 2026 तक)

बालोद – 4538, बलौदाबाजार – 3319, बलरामपुर – 3615, बस्तर – 3638, बेमेतरा – 4087, बीजापुर – 1879, बिलासपुर – 5259, दंतेवाड़ा – 2484, धमतरी – 2388, दुर्ग – 2874, गरियाबंद – 3760, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही – 3168, जांजगीर-चांपा – 2595, जशपुर – 3967, कांकेर – 3771, कवर्धा – 6294, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई – 2876, कोंडागांव – 2331, कोरबा – 2834, कोरिया – 2078, महासमुंद – 4185, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – 2833, मोहला-मानपुर-चौकी – 3206, मुंगेली – 3343, नारायणपुर – 623, रायगढ़ – 2580, रायपुर – 3069, राजनांदगांव – 4375, सक्ती – 2825, सारंगढ़-बिलाईगढ़ – 2825, सुकमा – 688, सूरजपुर – 2803, सरगुजा – 2528।

जलदूत प्रणाली से हो रही भूजल स्तर की निगरानी

जल संरक्षण कार्यों की वैज्ञानिक योजना और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए जीआईएस आधारित युक्तधारा प्लानिंग, सीएलएआरटी ऐप के माध्यम से स्थल चयन और वाटरशेड सिद्धांतों का उपयोग किया जा रहा है। भू-जल स्तर की नियमित निगरानी के लिए जलदूत प्रणाली लागू की गई है। शेष काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। – तारण प्रकाश सिन्हा, आयुक्त, वीबी-जी राम जी

3
IMG-20260612-WA0029
IMG-20260612-WA0030

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page