बिलासपुरः (सियासत दर्पण न्यूज़) त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में विकास कार्यों के वित्तीय आंकड़ों को लेकर बड़ा विरोधाभास सामने आया है। एक तरफ विभागीय प्रगति रिपोर्ट में अविभाजित बिलासपुर व गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) की पंचायतों में 15वें वित्त आयोग की 89 फीसदी यानी 405.22 करोड़ रुपये की भारी राशि खर्च होने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पंचायती राज मंत्रालय के आनलाइन पोर्टल पर अकेले बिलासपुर जिला पंचायत के खाते में 297 करोड़ की कुल आमद के सामने दर्जनों योजनाओं में व्यय शून्य दर्ज है।
कागजों में विकास की तेज रफ्तार और केंद्र के डिजिटल पोर्टल पर शून्य प्रगति ने प्रशासनिक अमले को कठघरे में खड़ा कर दिया है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक बिलासपुर जिले की 486 ग्राम पंचायतों सहित जीपीएम जिले की त्रिस्तरीय पंचायतों को 15वें वित्त आयोग से मिले संयुक्त 454.28 करोड़ रुपये में से 405.22 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
सर्वाधिक 168.15 करोड़ रुपये वर्ष 2021-22 में व्यय किए गए थे। इसके ठीक विपरीत, पंचायती राज मंत्रालय के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल वित्तीय वर्ष 2026-27 पर जिला पंचायत बिलासपुर कोड 334 के खाते में कुल 297.26 करोड़ रुपये उपलब्ध दिख रहे हैं, लेकिन खर्च के नाम पर महज 2.03 करोड़ रुपये ही दर्ज हैं।
पोर्टल पर स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा, स्कूल भवन अहाता निर्माण और पुराने वित्त आयोगों का खर्च 0.00 नजर आ रहा है। जानकारों का मानना है कि फील्ड में इतने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य होने के बाद भी पोर्टल पर खर्च पूरी तरह शून्य दिखना संभव नहीं है। ऐसे में यह सवाल गहरा गया है कि क्या फील्ड में हुए करोड़ों के निर्माण कार्यों की डिजिटल वाउचर एंट्री नहीं की गई या फिर साफ्टवेयर अपडेट न होने और जिले के विभाजन पश्चात समायोजन में देरी से विकास कार्य केवल फाइलों तक सीमित रह गए हैं।
बिलासपुर-जीपीएम में 89% बजट खर्च, 49 करोड़ बाकी
विभागीय आंकड़ों के अनुसार 15वें वित्त आयोग के तहत मिला कुल 454.28 करोड़ रुपये का आवंटन बिलासपुर और नवगठित जीपीएम जिले की पंचायतों के बीच संयुक्त रूप से वितरित हुआ था। दोनों जिलों की त्रिस्तरीय पंचायतों ने इसमें से 405.22 करोड़ रुपये 89.20% खर्च कर लिए हैं। वर्ष 2021-22 में सर्वाधिक 168 करोड़ खर्च के बाद रफ्तार घटी और चालू वर्ष में 31 जुलाई तक 30.34 करोड़ रुपये व्यय हुए, जबकि लगभग 49 करोड़ रुपये शेष हैं
बिलासपुर के 297 करोड़ में से सिर्फ दो करोड़ खर्च
मंत्रालय के आनलाइन डैशबोर्ड कोड 334 पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। यहां बिलासपुर जिला पंचायत के खाते में कुल 297.26 करोड़ रुपये की प्राप्ति दर्ज है, लेकिन व्यय केवल 2.03 करोड़ रुपये ही दिख रहा है, जो महज 15वें वित्त आयोग से आहरित है। स्वच्छ भारत मिशन के 49 करोड़, मनरेगा के 32 करोड़ और शाला भवन के 25 करोड़ रुपये का खर्च शून्य दिखना तकनीकी व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
किस मद में कितने रुपए आए और खर्च हुए
योजना / आयोग – प्राप्त बजट करोड़ में – पोर्टल पर दर्ज व्यय
15वां वित्त आयोग – 9.36 करोड़ – 2.03 करोड़ (बाकी अटका)
स्वच्छ भारत मिशन – 49.01 करोड़ – 0.00
मनरेगा – 32.51 करोड़ – 0.00
शाला भवन निर्माण – 25.27 करोड़ – 0.00
13वां व 14वां वित्त आयोग – 22.61 करोड़ – 0.00
साफ्टवेयर अपडेशन में सुस्ती या डिजिटल एंट्री से परहेज
करोड़ों के बजट में खर्च शून्य दिखने के पीछे तकनीकी जानकारों का कहना है कि नए वित्तीय वर्ष में पोर्टल पर साफ्टवेयर मैपिंग, पुराने अवशेषों का समायोजन और जियो-टैगिंग के बाद डिजिटल सिग्नेचर (डीएससी) से भुगतान की प्रक्रिया बेहद पेचीदा है। जिले की 486 पंचायतों में काम पूरा होने के बावजूद सचिव और तकनीकी अमला पोर्टल पर समय पर आनलाइन वाउचर अपलोड नहीं कर रहे हैं, जिससे डेटा अपडेट नहीं हो पा रहा है।
पुराने वित्त आयोगों और योजनाओं का पैसा भी अटका
पोर्टल पर सिर्फ चालू योजनाएं ही नहीं, बल्कि 14वें वित्त के 8.84 करोड़, 13वें वित्त के 13.77 करोड़, 12वें वित्त के 3.18 करोड़, मूलभूत कार्यों के 3.69 करोड़ और पिछड़े क्षेत्र अनुदान (बीआरजीएफ) के 4.18 करोड़ रुपये भी व्यय शून्य के साथ दर्ज हैं। वर्षों पुराने आयोगों का यह पैसा वास्तव में खर्च नहीं हुआ या आनलाइन पोर्टल पर हिसाब नहीं चढ़ाया गया, इसकी उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।






