भिलाई। (सियासत दर्पण न्यूज़) नल में टुल्लू पंप लगाकर पानी खींचने वालों पर कार्रवाई की बजाय पूरे क्षेत्र की बिजली गुल करना अब नहीं चलेगा। गर्मी में पानी के अनधिकृत दोहन को रोकने के लिए दुर्ग, भिलाई और रिसाली निगम क्षेत्रों में की जाने वाली करीब एक घंटे की बिजली कटौती पर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने आपत्ति जताते हुए निकाय प्रशासन की खिंचाई की है।
आयोग ने माना कि कुछ लोगों द्वारा पानी के अनधिकृत दोहन की सजा पूरे क्षेत्र के लोगों को देना उचित नहीं है। बिजली कटौती से समस्या के निदान की गारंटी भी नहीं, लेकिन आम लोगों की परेशानी जरूर बढ़ सकती है।
आयोग ने लिया संज्ञान
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। प्रकरण में छत्तीसगढ़ राज्य बिजली वितरण कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) के साथ दुर्ग, भिलाई और रिसाली नगर निगमों को भी पक्षकार बनाया गया था। मामले में तीन बार सुनवाई हुई। इसके बाद तीनों नगर निगमों के आयुक्तों की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया कि भविष्य में बिजली आपूर्ति बाधित करने के लिए न तो ऐसी कोई कार्रवाई की जाएगी और न ही बिजली कंपनी से इस तरह का अनुरोध किया जाएगा।
टुल्लू पंप रोकने पूरे क्षेत्र की बिजली गुल
भिलाई और दुर्ग में गर्मी के दौरान नलों में पानी का दबाव कम होने की शिकायत सामने आती रही है। निजी और सार्वजनिक नलों से टुल्लू पंप के जरिए पानी खींचने के कारण जलापूर्ति प्रभावित होने की शिकायतों के बाद संबंधित क्षेत्रों में करीब एक घंटे बिजली बंद करने की व्यवस्था की जाती थी।
पत्र लिखकर बिजली आपूर्ति बंद कराई थी
इस वर्ष भी गर्मी के दौरान जिला प्रशासन के माध्यम से दुर्ग, भिलाई और रिसाली नगर निगमों ने बिजली कंपनी को पत्र लिखकर कुछ क्षेत्रों में सुबह करीब एक घंटे बिजली आपूर्ति बंद कराई थी। इसी व्यवस्था पर आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया। तीनों निगमों और बिजली कंपनी के अधिकारियों को सुनवाई में उपस्थित होने कहा गया।
नहीं माना जा सकता प्रभावी माध्यम
आयोग ने स्पष्ट किया कि बिजली बंद करना पानी के अनधिकृत दोहन को रोकने का प्रभावी माध्यम नहीं है। वर्तमान तकनीकी दौर में वैकल्पिक बिजली स्रोत उपलब्ध हैं। लोग इनका इस्तेमाल कर पंप चला सकते हैं। ऐसे में बिजली काटने से जिस उद्देश्य को हासिल करने की कोशिश की जा रही है, उसके पूरा होने की गारंटी नहीं है।
एक की गलती, सभी को सजा
एक घंटे की बिजली कटौती का असर केवल टुल्लू पंप चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। घरेलू पानी की टंकियां नहीं भर पाने से परिवारों को पेयजल और दैनिक उपयोग के पानी की परेशानी हो सकती है। गर्मी में पंखे, कूलर और अन्य जरूरी विद्युत उपकरण बंद होने से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की दिक्कत बढ़ती है। बिजली पर निर्भर दुकानों, छोटे कारोबार और अन्य जरूरी कामकाज पर भी इसका असर पड़ता है। आयोग ने तीनों नगर निगम प्रशासन को बिजली गुल कराने की बजाय इसके लिए अन्य प्रभावी उपाय अपनाने कहा जिससे अंतिम छोर तक पानी पर्याप्त पहुंच सके।
बिजली कंपनी को भी चेताया
तीनों नगर निगमों के लिखित आश्वासन को आयोग ने अभिलेख पर लेते हुए सीएसपीडीसीएल को भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी नगर निगम अथवा प्रशासनिक प्राधिकरण के अनुरोध मात्र पर भविष्य में बिजली आपूर्ति बाधित नहीं की जाएगी। आयोग ने कहा कि पानी के अनधिकृत दोहन को रोकने के नाम पर बिजली आपूर्ति बंद करने की व्यवस्था आम जनता के लिए अधिक परेशानी का कारण बन सकती है।






