महासमुंद। (सियासत दर्पण न्यूज़) जिले में श्रमिकों को दूसरे राज्यों में ईंट भट्ठों पर भेजने के मामले में चर्चित अजगर उर्फ जगत कुमार गुप्ता के ग्राम बाम्हनडीह स्थित घर पर गुरुवार सुबह पुलिस ने दबिश दी। ग्रामीणों के अनुसार स्कॉर्पियो से पहुंची पुलिस टीम ने उसके घर पर कार्रवाई की।
बताया जा रहा है कि टीम बसना पुलिस की थी। इसी दौरान महासमुंद पुलिस की एक अन्य टीम के खरियाररोड में श्रमिक दलाली से जुड़े लता कुमार के घर पहुंचने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, पुलिस ने गुरुवार देर तक दोनों कार्रवाइयों के संबंध में आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की थी।
जगत गुप्ता को क्षेत्र में ‘भट्ठा सरदार’ के नाम से भी जाना जाता है। उसके खिलाफ श्रमिकों को जबरदस्ती ईंट भट्ठों में काम कराने, दूसरे राज्यों में जाने के लिए दबाव बनाने और धमकी देने संबंधी शिकायतें सामने आती रही हैं। पिछले वर्ष श्रमिकों को बंधक बनाए जाने से जुड़े मामले में भी पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था और वह जेल जा चुका है।
श्रमिक की आत्महत्या के बाद दर्ज हुआ था अपराध
11 अक्टूबर 2025 को पटेवा थाना क्षेत्र के ग्राम बनपचरी निवासी 40 वर्षीय श्रमिक शत्रुघन खड़िया ने जहर का सेवन कर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस के अनुसार मृतक ने इससे पहले पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवेदन देकर जगत गुप्ता पर ईंट भट्ठे में काम करने और दूसरे राज्य जाने के लिए लगातार दबाव बनाने तथा जान से मारने की धमकी देने की शिकायत की थी।
मर्ग जांच के दौरान पुलिस ने मृतक के स्वजन और स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज किए। पुलिस के अनुसार मृतक की पूर्व शिकायत, परिजनों और गवाहों के कथनों के आधार पर सामने आया कि ईंट भट्ठे में काम करने के लिए बनाए जा रहे दबाव से वह परेशान था। जांच के बाद पटेवा पुलिस ने जगत कुमार गुप्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। इसी मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई थी।
खेती के बाद दूसरे राज्यों में जाते हैं श्रमिक
महासमुंद जिले में खेती-किसानी का काम खत्म होने के बाद रोजगार की तलाश में श्रमिकों के दूसरे राज्यों में जाने का सिलसिला लंबे समय से जारी है। यह मुख्य रूप से मौसमी पलायन है। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने पर श्रमिक ठेकेदारों के माध्यम से ईंट भट्ठों, निर्माण कार्य, कृषि और अन्य असंगठित क्षेत्रों में काम करने के लिए बाहर जाते हैं।
श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले से 927 श्रमिकों का पलायन पंजीकृत है। भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिकों के प्रवासी पंजीयन में 4531 श्रमिक पंजीकृत हैं। हालांकि, पंजीकृत संख्या को वास्तविक पलायन का पूरा आंकड़ा नहीं माना जा सकता। बड़ी संख्या में श्रमिक बिना पंजीयन ठेकेदारों के माध्यम से दूसरे राज्यों में जाते हैं। ऐसे में श्रमिकों को बाहर भेजने वाले दलालों की भूमिका और उनकी गतिविधियों की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।






