रायपुर,, सियासत दर्पण न्यूज़,ऑल इंडिया उलमा एंड मशाइख़ बोर्ड छत्तीसगढ़ यूनिट ने आज 26 अक्टूबर 2026 दोपहर 3.30 बजे जिला कलेक्टर रायपुर के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति महोदया को भारत के विभिन्न शहरों में विगत कुछ समय से मस्जिदों को असंवैधानिक तरीके से तोड़ने कार्यवाही की जा रही है, इसके खिलाफ एक ज्ञापन यूनिट के प्रदेश अध्यक्ष क़ारी मोहम्मद इमरान अशरफी (काज़ी ए शहर रायपुर) और स्टेट जनरल सेक्रेटरी नोमान अकरम हामिद के नेतृत्व में सैकड़ो साथियों की उपस्थिति मे दिया।
मालूम हो कि विगत दिनों सहारनपुर मस्जिद, उज्जैन मस्जिद, दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद सहित मुल्क के अलग-अलग शहरों में मस्जिदों के ख़िलाफ़ कार्यवाही की जा रही है जो कि घोर निन्दनीय है।
भारत के संविधान में सभी धर्मों के लोगों को अपनी – अपनी पूजा करने का समान अधिकार है तथा यह भी स्पष्ट है कि 1947 के पहले के सभी पूजा स्थल को छेड़ा नहीं जाएगा। उसके बावजूद मुस्लिम समाज की उन मस्जिदों में कार्यवाही की जा रही है जो कि 200-300 साल पुरानी है तथा भारतीय गैजेट में इन्हें हैरिटेज के रूप में स्थान दिया गया है। सबसे चिन्ता का विषय है कि बिना किसी सुनवाई एवं वैधानिकता की जांच किए बिना इन मस्जिदों को बलपूर्वक तोड़ा जा रहा है। ज्ञात हो कि हत्या के आरोपी को भी अपनी बुगुनाही साबित करने का पर्याप्त अवसर प्राप्त है परन्तु मस्जिद जहां से केवल शांति, मुहब्बत एवं इबादत का पैगाम दिया जाता है, उन मस्जिदों को बिना किसी सुनवाई के ध्वस्त किया जा रहा है।
आज महबूबिया चौक पर उमड़ा यह जनसैलाब सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं है। यह भारत की उस साझी आत्मा की गूंज है, जिसे सदियों से हमारे सूफियों, संतों और ऋषियों ने अपने खून से सींचा है।
भारत सरकार को यह समझना होगा कि यह विरोध सिर्फ ईंट और पत्थरों के लिए नहीं है। यह विरोध इस देश के ‘विश्वास’ को बचाने के लिए है, क्योंकि इस मुल्क की बुनियाद ही विविधता पर टिकी है। आज जब हम अपनी इबादतगाहों की हिफाजत की मांग कर रहे हैं, तो हम भारत के उस मुकम्मल ताने-बाने की बात कर रहे हैं जिसमें हर रंग शामिल है।
जहां इस्लाम का ‘हक और इंसाफ’:- जो जुल्म के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से खड़े होने को सबसे बड़ी इबादत मानता है। कुरान मजीद सिखाता है कि किसी भी बेकसूर का नुकसान पूरी इंसानियत का नुकसान है।
वहीं सनातन परंपरा का ‘आत्मवत् सर्वभूतेषु’:- जो सिखाता है कि हर जीव में एक ही ईश्वर का अंश है। अगर एक जगह इबादत का हक छीना जाता है, तो दर्द पूरे देश को होना चाहिए।
ऋग्वेद कहता है-एकं सद्धिप्रा बहुधा वदन्ति (सत्य एक है, बुद्धिमान उसे अलग-अलग नामों से बुलाते हैं)।
सिख धर्म का ‘सरबत दा भलाः गुरु नानक देव जी और गुरु गोबिंद सिंह जी का वह फलसफा, जिसने हमेशा मजलूम की ढाल बनना सिखाया। नौवें गुरु ने तो तिलक और जनेऊ की रक्षा के लिए अपनी शहादत दे दी थी।
बौद्ध और जैन धर्म का ‘स्याद्वाद और करुणाः भगवान महावीर का ‘जियो और जीने दो’ और महात्मा बुद्ध का मध्य मार्ग, जो बताता है कि सत्ता की अकड़ से बड़ी इंसान की करुणा होती है।
इसी प्रकार ईसाई समाज का ‘प्रेम और क्षमा’:- प्रभु ईसा मसीह का संदेश कि समाज के सबसे आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है।
कबीर दास जी ने जब हाथ में करघा लिया, तो उन्होंने सिर्फ कपड़ा नहीं बुना, बल्कि हिंदू और मुसलमान को एक धागे में पिरोया।
निज़ामुद्दीन औलिया के आस्ताने पर अमीर खुसरो ने जो रंग बरसाया, वह आज भी भारत की हवाओं में महकता है। छत्तीसगढ़ की इस पावन धरती पर बाबा घासीदास ने ‘मनखे-मनखे एक समान’ का जो संदेश दिया, वह आज के शासकों को याद दिलाने की ज़रूरत है।
हम यहाँ देश के सबसे बड़े ग्रंथ-‘भारत का संविधान’ की लाज रखने आए हैं। बाबा साहब आंबेडकर ने जो संविधान हमें दिया, उसकी प्रस्तावना (Preamble) चीख-चीख कर कहती है कि इस मुल्क में सबको सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय मिलेगा। विचार, अभिव्यक्ति और विश्वास की आज़ादी मिलेगी।
प्रशासन और सरकार कान खोलकर सुन ले, जब-जब इस देश के संविधान की मूल भावना को ठेस पहुंचेगी, तब-तब भारत का आम नागरिक सड़कों पर आकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करेगा। हमारी मस्जिदों की मीनारें सिर्फ नमाज़ की दावत नहीं देर्ती, ये अमन, भाईचारे और आसमान छूते हौसले की गवाही देती हैं।
अनेकता में एकता भारत की पहचान रही है एवं सभी धर्म के मानने वालों आपस में प्रेमपूर्वक रहते हैं, परंतु विगत कुछ वर्षों से मुस्लिम समाज की ईबादतगाह के साथ ज्यादती की जा रही है, जिसका हम छत्तीसगढ़ के मुस्लिम समाज घोर निन्दा करते हैं एवं आपसे प्रार्थना करते हैं कि कृपया ऐसी कार्यवाही पर तत्काल रोक लगाने की कृपा करें।





