सियासत दर्पण न्यूज़,हिंदी सिनेमा की कोहिनूर एक्ट्रेस रहीं जोहरा सहगल की 112वीं बर्थ एनिवर्सरी पर उनकी जिंदगी के कुछ अहम किस्से बता रहे हैं। जोहरा सहगल ने अपनी जिंदगी में भारत-पाकिस्तान के विभाजन से लेकर दंगों का खौफ तक झेला। उनको बाल विवाह से बचाने के लिए प्रिंसिपल ने भी 3 बार फेल कर दिया था।
जोहरा सहगल बेशक नवाबों के खानदान में जन्मी थीं, लेकिन उनका परिवार खुले विचारों वाला नहीं था। तभी तो, जब एक्ट्रेस 10वीं क्लास में पहुंचीं तो घरवालों ने उनके रिश्ते खोजने शुरू कर दिए। जोहरा सहगल पढ़ाई में अव्वल थीं और हमेशा टॉप करती थीं। उनके प्रिंसिपल भी प्रभावित थे। पर घरवाले तो जोहरा सहगल की शादी करने पर तुले थे। यह देख प्रिंसिपल ने जोहरा सहगल को 10वीं क्लास में तीन बार फेल कर दिया था ताकि एक्ट्रेस की शादी को रोका जा सके।
जोहरा सहगल पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल में होने वाले प्रोग्राम और नाटकों में भी हिस्सा लेती थीं। यहीं से उनका रुझान एक्टिंग की तरफ हो गया। लेकिन पिता नहीं चाहते थे कि जोहरा सहगल यह सब करे। वह तो बड़ी बेटी की तरह जोहरा की भी जल्दी से शादी कर देना चाहते थे। लेकिन जोहरा सहगल के मामा उन्हें अपने साथ यूरोप ले गए और वहां एक्ट्रेस बैले डांस स्कूल जॉइन कर लिया। उसी दौरान जोहरा सहगल डांस कोरियोग्राफर उदय शंकर से मिलीं और उनके ग्रुप का हिस्सा बन गईं।
साल 1940 में जोहरा सहगल भारत वापस लौट आईं और अल्मोड़ा के उदयशंकर इंडिया कल्चरल सेंटर में टीचर बन गईं। यहीं पर जोहरा सहगल की मुलाकात एक युवा वैज्ञानिक, डांसर और पेंटर कामेश्वर सहगल से हुई, जिनसे उन्होंने बाद में शादी कर ली। कामेश्वर उम्र में जोहरा सहगल से 8 साल छोटे थे। इसी वजह से उनके परिवार में खूब बवाल और झगड़ा हुआ। हालांकि बाद में परिवारवाले मान गए, और शादी के बाद जोहरा पति संग लाहौर चली गईं।
लेकिन लाहौर से जोहरा सहगल तो तब मुंबई भागना पड़ा, जब भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद लाहौर में दंगे शुरू हुए। क्या महिलाएं, क्या बच्चे और क्या बुजुर्ग…हर किसी को लोग मारने-काटने दौड़ पड़े। तब जोहरा सहगल की एक साल की बच्ची भी साथ थी। वह उसके और पति के साथ किसी तरह जान बचाकर भारत आ गईं। लाहौर में जोहरा सहगल और उनके पति ने ‘जोहरा डांस इंस्टिट्यूट’ के नाम से डांस अकेडमी शुरू की थी। सब अच्छा चल रहा था, पर विभाजन के बाद सब बिगड़ गया।
भारत आने के बाद जोहरा सहगल पृथ्वी थिएटर से जुड़ गईं और 400 रुपये महीने की पगार पर काम करने लगीं। फिर 1945 में उनकी फिल्मों में एंट्री हुई और पीछे मुड़कर नहीं देखा। जोहरा सहगल ने सात दशक से भी लंबे वक्त तक काम किया और लोगों के दिलों पर राज किया। वह ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ और ‘वीर जारा’ जैसी फिल्मों में दादी के रोल में नजर आईं। चूंकि वह 102 साल तक जीवित रहीं, इसीलिए उन्हें ‘लाडली ऑफ सेंचुरी’ का खिताब भी मिला था।









