लेकिन इस बीच भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकार गैर जिम्मेदार अधिकारियों की भेट ज़रूर चढ़ रहे हैं।
शाम के भोजन की जुगत में निकले अर्जुन और उनके छोटे भाई, स्कूल क्यों नही जानें के सवाल पर भावुक हो जाते हैं,जवाब मिलता है “आधार कार्ड नहीं बना इसलिए स्कूल में दाखिला नहीं मिल पाया है”
बिलासपुर,सियासत दर्पण न्यूज़:भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकार शहर की गलियों में उस वक्त खाक छानते नज़र आते हैं जब शाम के भोजन की जुगत में निकले अर्जुन और उनके छोटे भाई स्कूल क्यों नही जानें के सवाल पर भावुक हो जाते हैं। जवाब मिलता है “आधार कार्ड नहीं बना इसलिए स्कूल में दाखिला नहीं मिल पाया है” साथ ही उनके भाई को चोट लगी है वहीं भोजन की व्यवस्था करने के लिए वे कबाड़ा बीन रहे हैं।

जिन मासूमों को आधार कार्ड की वजह से स्कूल में दाखिला नहीं मिल पा रहा उन्हें महिने भर के गुजारे के लिए 5 किलो राशन मिलता है या नहीं इस बात का अंदाजा खाने की फिक्र में कबाड़ा बीन रहे इन बच्चों की हालात से लगाया जा सकता है। बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी भले माता-पिता की है लेकिन 14 साल तक के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा अधिकार मिले यह सुनिश्चित कराने की जिम्मदेरी जिला प्रशासन की बनाती है। उम्र कम होने की वजह से भले उन्हें कोई काम पर नही रखे लेकिन कबाड़ा बीनने से कौन रोक सकता है? रोके भी तो भला क्यों प्लास्टिक रिसाइकिल इंडस्ट्री में कबाड़ा एक बहुत बड़ा योगदान जो रखता है। शहर की सफ़ाई और देश की अर्थव्यस्था में भी कबाड़ा बहुत सहायक हो सकता है। शायद यही वजह रही होगी जिससे देवनगर में रहने वाले अर्जुन पुत्र तिलक और उनके भाई का स्कूल में दाखिला नही हो पाया हैं। यह बात इस लिहाज से भी अच्छी हो सकती है कम से कम भीख तो नहीं मांग रहे, जेब तो नही काट रहे किसी की अपना पेट भरने के लिए उनसे जो हो सकता है वह काम वो कर रहे हैं। लेकिन इस बीच भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकार गैर जिम्मेदार अधिकारियों की भेट ज़रूर चढ़ रहे हैं।
सियासत दर्पण न्यूज़ से बिलासपुर ज़िला ब्यूरो चीफ डॉ शाज़िया अली खान की रिपोर्ट,,









