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*ज़ख़्म पे जश्न आपने कभी लाशों पे भांगड़ा किया है ? अरे आप ग़ुस्सा क्यों कर रहे हैं,पढ़े पूरी खबर*

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ज़ख़्म पे जश्न,By यूनुस मोहनी, 4, 7, 2024
आपने कभी लाशों पे भांगड़ा किया है ? अरे आप ग़ुस्सा क्यों कर रहे हैं मैंने तो बस एक सवाल पूछा है आप तो सिर्फ़ इस बात से भड़क गये वैसे देश में सब कुछ कुशल मंगल है हर तरफ़ ख़ुशियों की बाढ़ आई हुई है यह बात और है कि अचानक इतनी ख़ुशियों की बाढ़ में किसी का पूरा परिवार जल प्रपात में बह गया , ख़ुशियों में थोड़ा बहुत तो रंग भंग होता ही है तो इसी बीच कुछ लोग भीड़ की हिंसा का शिकार हो गये अब जब चारागाँ हुआ है तो कहीं आग भी लगेगी ही यह कौन सी नई बात है तो मणिपुर अभी तक जल रहा है थोड़ा बहुत छत्तीसगढ़ भी झुलसा हुआ है लेकिन जश्न तो जश्न है उसे तो मनाया जाना चाहिए ?
अब यह कुछ लोगों की मौतें शोक में डूब जाने का विषय हरगिज़ नहीं हो सकती और वह भी तब जब मरने वाले गरीब आम आदमी हों अरे इनकी ज़िंदगी ही कौन सी मौत से बेहतर थी जो इनकी मौत पर आंसू बहाए जायें ,ख़ुशी बहुत बड़ी है समझ नहीं आ रहा है कि इसे कैसे मनाया जाये जो यादगार बन जाये आख़िर भारत विश्व विजेता बन गया है जीहाँ आप क्या समझे अरे आप ग़लत हैं भ्रष्टाचार में नहीं वह तो समाप्त हो गया है भारत में उसपे बिलकुल लगाम लग चुकी है पुल वग़ैरह बह रहे हैं या गिर रहे हैं एयरपोर्ट भरभरा कर गिर रहे हैं इसमें भ्रष्टाचार का कोई पहलू नहीं है मुमकिन है विपक्ष सरकार को बदनाम करने के लिए ऐसा करवा रहा हो पूरे देश के ख़ुफ़िया तंत्र को इसकी जाँच पर लगाना चाहिए वैसे पुल तो बनते ही बहने के लिए हैं फिर बन जाएँगे !
भारत ग़रीबों को राशन बाटने में विश्व विजेता पहले ही बन चुका है भारत के प्रधानमंत्री कितनी बार बता चुके हैं कि 80 करोड़ भारतीयों को फ्री राशन दिया जा रहा लेकिन सरकार की दयालुता तो देखिए मजाल है इस बात पर जश्न मनाया हो 140 करोड़ की आबादी में 80 करोड़ लोग फ्री राशन लेने योग्य हैं इससे बड़ी उपलब्धि क्या हो सकती है भला ?भारत सबसे अधिक बेरोज़गार युवा वाला देश भी बन गया है यानी इस मामले में भी विश्व विजेता अब सोचिए इतनी बड़ी युवा शक्ति है हमारे पास और जिसके पास कोई काम भी नहीं है अगर भारत चाहे तो दुश्मन देश को अपने बेरोज़गार युवाओं की रील दिखा कर परास्त कर सकता है लेकिन मजाल है इसका ज़िक्र भी किया जाये !


लेकिन फ़िलहाल भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की टीम द्वारा टी20 वर्ल्ड कप जीत लिया गया है और इसके बाद आज यह टीम भारत वापिस पहुँची है जिसका जश्न चल रहा है भला जश्न क्यों न हो हमारे देश के गृह मंत्री जी के बेटे जिस बोर्ड के सचिव हैं उसकी टीम ने यह कारनामा किया है तो जश्न तो बनता ही है अब जब इतनी ज़्यादा वाली ख़ुशी की बात है तो भारत के प्रधानमंत्री का भी कोई फ़र्ज़ बनता है कि वह टीम के हर एक सदस्य से मिलें और उनकी भेंट भी दें क्योंकि यह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की टीम है कोई अग्निवीर थोड़ी हैं जो सरहद पर मर भी जायें तो उनको शहीद का दर्जा नहीं मिलता मुआवज़ा मिलता है या नहीं अभी इसपर स्थिति साफ़ नहीं है !
आप बार बार चौक रहे होंगे कि मैं इस विश्व विजेता टीम को भारतीय क्रिकेट टीम क्यों नहीं कह रहा तो आइये कुछ जानकारी आप भी रख ही लीजिए और वह यह है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत तमिलनाडु में एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत है, एक स्वायत्त निकाय है और इसे भारत सरकार से कोई अनुदान या फंडिंग नहीं मिलती है। 2004 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय में बीसीसीआई ने कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम बीसीसीआई की आधिकारिक टीम है न कि भारत की आधिकारिक टीम ,और यह राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराती है या बोर्ड की गतिविधियों में किसी राष्ट्रीय प्रतीक का उपयोग नहीं करती है। बीसीसीआई अर्जुन पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए अपने खिलाड़ियों की सिफारिश करता है लेकिन कहता है कि यह एक राष्ट्रीय खेल महासंघ नहीं है। मतलब कुछ समझ आया कि नहीं ?
जी हाँ इसी टीम का स्वागत सत्कार प्रधानमंत्री जी ने भी किया और पूरे मीडिया में इसी की खबर है बस वजह पता है आपको नहीं पता तो सुनिए दुनिया भर के सभी क्रिकेट बोर्ड से अधिक धनवान भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड है ख़ैर हमसे आपसे इन फ़िज़ूल बातों से क्या मतलब हमें तो जश्न मनाना है तो मनाइए खूब नाचिये आपसे क्या जो किसी के घर में चार चार लाशें हैं आपको क्या फ़र्क़ पड़ता है किसी माँ की गोद उजड़ जाने से किसी दुधमुँहें बच्चे से ममता की छांवँ छीन लिये जाने से आपको कब फ़र्क़ पड़ता है मौत के तांडव से आप जश्न मनाइए क्योंकि लाशें ग़रीबों की हैं और ख़ुशियाँ अमीरों के घर की दासी हैं !
आइये भारत की सरकार के साथ खड़े होकर हम सब जश्न का एलान करें भले यह किसी के दर्द को और बढ़ा ही क्यों न दे आख़िर ख़ुशी भी कोई चीज़ है जिस देश में एक साथ सैकड़ों लोग कुचल कर मर जाते हों जहां लोग सड़क पर हिंसक भीड़ का शिकार हो रहे हों वहाँ यह जश्न आपको अगर नहीं झिंझोड़ते तो ज़रूर ख़ुशियों से झूम उठिये आपको खूब मुबारक भले उसके लिए गरीब की लाश पर खड़े होकर ही क्यों न नाचना पड़े ?
जिस समय देश के मुखिया को सुध लेनी थी हाथरस के पीड़ितों की उस वक़्त ज़ख्मों पर जश्न मुबारक क्योंकि मरने वाले गरीब हैं और चुनाव अभी दूर हैं !
✍️ यूनुस मोहनी
(लेखक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हसरत मोहानी के वंशज, वरिष्ठ पत्रकार एवं The Muslim Era के प्रधान संपादक है)

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