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*महिला घाट तोड़ने और बैंक हटाने की मांग पर कांकेरवासियों का विरोध तेज,कांकेर से गणेश तिवारी की रिपोर्ट*

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सियासत दर्पण न्यूज़ कांकेर से गणेश तिवारी की रिपोर्ट

दड़िया तालाब परिसर की अव्यवस्था से भड़के श्रद्धालु, धार्मिक माहौल दूषित होने पर जताई कड़ी नाराज़गी

कांकेर।सियासत दर्पण न्यूज़,कांकेर शहर के मध्य स्थित आस्था स्थल दड़िया तालाब और उसके आसपास व्याप्त गंदगी व अव्यवस्था को लेकर श्रद्धालुओं और आम नागरिकों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। तालाब के बीच बने महिला घाट और उसके समीप संचालित बैंक शाखाओं को लेकर शहरवासियों ने खुलेआम नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि यह स्थल अब आस्था का केंद्र न रहकर अस्वच्छता का गढ़ बन चुका है, जिसके चलते धार्मिक भावनाएँ आहत हो रही हैं।

आस्था का केंद्र बना परेशानी का कारण

दड़िया तालाब न केवल कांकेर शहर बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों की आस्था का प्रमुख स्थल है। यहाँ पंचमुखी हनुमान मंदिर और शिव मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र हैं, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन और पूजा करने पहुंचते हैं। मंगलवार, शनिवार और सोमवार को यहां भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण और विशेष पूजा का आयोजन भी होता है।

लेकिन महिला घाट और उसके पास मौजूद बैंकों की वजह से यह धार्मिक स्थल आए दिन विवाद और गंदगी का शिकार हो रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि आस्था की पवित्रता के बीच इस तरह की अव्यवस्था असहनीय है।

महिला घाट पर जताई गई आपत्ति

तालाब के बीच महिला घाट का निर्माण

महिलाओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए किया गया था ताकि वे स्नान और धार्मिक कार्य कर सकें। मगर शहरवासियों का कहना है कि इस घाट का वास्तविक उपयोग अब नहीं हो रहा। समय के साथ यह पूरी तरह बदहाल और अनुपयोगी हो चुका है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि घाट पर अब धार्मिक गतिविधियों की जगह असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होता है। खुलेआम लोग यहां मूत्र त्याग करते हैं, जिससे पूरे वातावरण में दुर्गंध फैल जाती है। पास स्थित मंदिरों में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को इस बदबू और गंदगी का सामना करना पड़ता है।

बैंक शाखाएँ बनी असुविधा का कारण

महिला घाट के समीप यूनियन बैंक सहित कई बैंकों की शाखाएँ संचालित हैं। श्रद्धालुओं ने कहा कि बैंकों में आने-जाने वाले कुछ लोग भी घाट के किनारे गंदगी फैलाते हैं। इससे तालाब का धार्मिक वातावरण दूषित हो रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आस्था स्थलों के इतने करीब बैंकों का संचालन किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।

शहरवासियों ने उठाई आवाज, आंदोलन की चेतावनी

आमापारा वार्ड सहित पूरे क्षेत्र के श्रद्धालु और निवासी लंबे समय से इस समस्या को उठाते आ रहे हैं। पार्षद नरेंद्र साहू ने स्पष्ट कहा कि महिला घाट और उसके समीप संचालित बैंकों को लेकर विरोध बढ़ रहा है। श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए प्रशासन को तुरंत कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि महिला घाट को तोड़कर तालाब परिसर को साफ-सुथरा किया जाए और बैंकों को अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाए। यदि इस विषय पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होती तो लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन को अब ढुलमुल रवैया छोड़कर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए, अन्यथा यह मामला और गंभीर रूप ले लेगा।

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