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*रायपुर,,प्रधानमंत्री आवास योजना 870 में पानी की दिक्कत से मोहल्ले वाले परेशान,,निगम को सौंपा ज्ञापन*

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इधर जल बोर्ड का गठन उधर मोहल्ले वासी शिकायत लेकर पहुंचे

रायपुर।सियासत दर्पण न्यूज़,,मामला रायपुर के कचना का है जहां, पानी की दिक्कत को लेकर मोहल्ले वासियों ने निगम के नेता प्रतिपक्ष को ज्ञापन सौंपा और समस्या का समाधान करने की मांग की । उनकी प्रमुख मांगों में मोहल्ले में एक बोर की स्थापना , निगम का एक ऑपरेटर दिया जाना और हो सके तो अमृत मिशन की सुविधा प्रधान मंत्री आवास योजना 870 में प्रदान किया जाना शामिल है।

 

वार्डवासियों का कहना है कि, समय पर पानी नहीं मिलने के कारण दिनचर्या प्रभावित होती हैं। उसके अलावा आपस में तनाव का माहौल रहता है।  निगम कभी कभी  1 या 2 टैंकर भेजता है लेकिन आपूर्ति होती नहीं परिणाम पानी को लेकर मारपीट तक हो जाती हैं। अभी तो ठंड है और ऐसे में पानी की गुणवत्ता भी इतनी खराब हो जाती हैं कि, कभी झाग तो कभी पानी से दुर्गंध जैसी समस्या बनी रहती है। तब गर्मियों में क्या हाल होगा इसका तो अंदाजा लगाया जा सकता है।

रहवासियों में एक बुजुर्ग 83 वर्ष के है  अकेले रहते हैं।और पानी ना आने से उन्हें पानी लेकर  तीसरी मंजिल तक चढ़ाई करनी पड़ती हैं । वहीं एक कामकाजी महिला है , बीमारी से पीड़ित है छोटी बच्ची के साथ रहती है, तीसरी मंजिल में होने के कारण बच्ची को पानी लेने जाना पड़ता है महिला बीमारी के कारण पानी लेने नहीं जा सकती। पूरे मोहल्ले में ऐसे बहुत से किस्से हैं।

लेकिन समस्या का कारण सिर्फ एक पानी ! जिसके समाधान के लिए सभी अपनी एक दिन की रोज़ी छोड़कर निगम गुहार लगाने आए है।

सारे घर आवास योजना के अंतर्गत आबंटित है। शासन की योजना का हिस्सा है। बहुत दूर दराज में भी नहीं है कि, आपूर्ति ना की जा सके उसके बावजूद ऐसी समस्या प्रशासन का रवैया जाहिर करती हैं। वहां से कुछ दूर ही अमृत मिशन योजना संचालित है। जल बोर्ड का गठन भी हाल ही में किया गया है।

 

पानी की समस्या दूर करने के लिए जल बोर्ड का गठन

महापौर मीनल चौबे का दावा है, कि इस जल बोर्ड को फिल्टर प्लांट से लेकर शहर के अंतिम छोर तक की पूरी जल वितरण व्यवस्था की निगरानी और सुधार की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इससे न सिर्फ रायपुर वासियों की प्यास बुझेगी बल्कि रायपुर नगर निगम टैंकर मुक्त भी होगा.

 

वाटर नेटवर्क की मैपिंग और माइक्रो मॉनिटरिंग का दावा

जल बोर्ड को राइजिंग मेन, डिस्ट्रीब्यूशन लाइन, सप्लाई सिस्टम, लीकेज पॉइंट्स और जल संकट वाले इलाकों की पहचान कर उनके स्थायी समाधान की जिम्मेदारी दी गई है. निगम प्रशासन का दावा है, कि अब सिर्फ शिकायतें दर्ज नहीं होंगी, बल्कि हर समस्या की जड़ तक जाकर समाधान किया जाएगा. इसे शहर की बिगड़ती जल व्यवस्था सुधारने के लिए अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक हस्तक्षेप माना जा रहा है.

विपक्ष का हमला: “देर से लिया गया, बिना ठोस तैयारी का फैसला

जल बोर्ड के गठन के साथ ही सियासत भी तेज हो गई है. नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इस फैसले को “देर से लिया गया और दिखावटी” बताया. नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि जिन अधिकारियों को बोर्ड में शामिल किया गया है, उनमें से एक जल्द रिटायर होने वाले हैं, बाकी को जल प्रबंधन का विशेष अनुभव नहीं है. नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इसे ट्रिपल इंजन सरकार की विफलता बताते हुए कहा, हर साल गर्मी में जनता के गुस्से से बचने के लिए ऐसे कदम उठाए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान कभी नहीं किया जाता

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