डॉ. शाजिया खान की रिपोर्ट
सियासत दर्पण न्यूज़,,हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के महामना मदन मोहन मालवीय शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (MMMTC) के तत्वावधान में रिफ्रेशर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आचार्य अरुण दिवाकर नाथ बाजपेयी, पूर्व कुलपति, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर ने प्रतिभागियों को संबोधित किया।
कार्यक्रम का विषय था — “भारत की संघीय व्यवस्था और शासन की चुनौतियां”।
अपने उद्बोधन में आचार्य बाजपेयी ने कहा कि भारतवर्ष को संघीय व्यवस्था के रूप में देखना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत एक समग्र और एकात्म चेतना का नाम है, जिसके विभिन्न राज्य अभिन्न अंग हैं।
उन्होंने संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुच्छेद 246 का उल्लेख करते हुए कहा कि संघीय सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के कारण केंद्र और राज्यों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न होती रहती है। विशेषकर तब जब केंद्र और राज्यों में अलग-अलग दलों की सरकारें हों।

आचार्य बाजपेयी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह हमेशा संभव नहीं होता कि केंद्र और राज्यों में एक ही दल की सरकार हो। ऐसी स्थिति में संघीय और समवर्ती सूचियां संबंधों में बिखराव लाती हैं और यह राष्ट्रीय एकता के लिए गंभीर चुनौती बन जाती हैं।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों और प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया तथा आचार्य बाजपेयी के विचारों को गहनता से आत्मसात किया।
सियासत दर्पण न्यूज़ से बिलासपुर ब्यूरो चीफ़ शाज़िया खान की रिपोर्ट
