रायपुर,,सियासत दर्पण न्यूज़,समान नागरिक संहिता का विषय संविधान के अनुच्छेद 44 में वर्णित राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांत से संबंधित है। साथ ही, किसी भी UCC कानून का निर्माण और क्रियान्वयन संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों तथा अन्य संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होना आवश्यक है।
इसी संवैधानिक दृष्टिकोण से Tahaffuz-e-Namoos-e-Risalat Action Trust (TNRAT), छत्तीसगढ़ प्रदेश निम्नलिखित मांगें प्रस्तुत करता है:
1. अनुच्छेद 44 के साथ मौलिक अधिकारों का संवैधानिक संतुलन सुनिश्चित किया जाए
UCC से संबंधित किसी भी कानून या नीति का निर्माण करते समय संविधान के अनुच्छेद 44 के साथ-साथ अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26 एवं 29 में निहित अधिकारों और संवैधानिक सीमाओं का भी उचित ध्यान रखा जाए।
2. मुस्लिम समाज के धार्मिक आचरण से प्रभावित होने वाले प्रावधानों की विशेष संवैधानिक समीक्षा हो
यदि प्रस्तावित UCC का कोई प्रावधान मुस्लिम नागरिकों के धार्मिक आचरण या धर्म से जुड़े व्यक्तिगत मामलों को प्रभावित करता है, तो उसकी अनुच्छेद 25 के संदर्भ में संवैधानिक समीक्षा की जाए। धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की संवैधानिक सीमाओं को भी ध्यान में रखा जाए।
3. मुस्लिम धार्मिक संस्थाओं से संबंधित विषयों पर अनुच्छेद 26 का ध्यान रखा जाए
UCC के किसी प्रावधान का प्रभाव मुस्लिम धार्मिक संप्रदायों या धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों पर पड़ता हो, तो अनुच्छेद 26 के तहत प्राप्त संवैधानिक संरक्षण और उसकी निर्धारित सीमाओं को ध्यान में रखते हुए उसकी समीक्षा की जाए।
4. अनुच्छेद 14 के तहत समानता और विधि के समान संरक्षण की कसौटी पर प्रत्येक प्रावधान परखा जाए
UCC की प्रत्येक धारा की समीक्षा इस आधार पर की जाए कि वह कानून के समक्ष समानता तथा विधि के समान संरक्षण के संवैधानिक सिद्धांत के अनुरूप हो और उसका क्रियान्वयन मनमाना या अनुचित न हो।
5. अनुच्छेद 15 एवं 21 के संवैधानिक संरक्षणों का पूरा ध्यान रखा जाए
UCC से संबंधित प्रावधानों में धर्म एवं अन्य संरक्षित आधारों पर असंवैधानिक भेदभाव न हो तथा विवाह, परिवार एवं व्यक्तिगत मामलों से जुड़े प्रावधानों में व्यक्ति के जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
6. मुस्लिम विवाह, निकाह, मेहर एवं तलाक से जुड़े प्रभावों पर स्पष्टता दी जाए
यदि UCC के प्रावधान मुस्लिम विवाह, निकाहनामा, मेहर या तलाक से संबंधित मौजूदा व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, तो उनके प्रभाव को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया जाए तथा मुस्लिम समाज के विधि विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों से इस विषय पर औपचारिक परामर्श किया जाए।
7. उत्तराधिकार एवं वसीयत के संबंध में मुस्लिम परिवारों पर प्रभाव का अध्ययन हो
मुस्लिम परिवारों के उत्तराधिकार, वसीयत एवं संपत्ति संबंधी अधिकारों पर प्रस्तावित प्रावधानों के कानूनी, सामाजिक, आर्थिक एवं पारिवारिक प्रभाव का स्वतंत्र विशेषज्ञ अध्ययन कराया जाए और उसके निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएँ।
8. पहले से प्राप्त वैध अधिकारों और दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
यदि UCC लागू किया जाता है, तो पहले से संपन्न वैध निकाह, निकाहनामे, मेहर, वसीयत एवं अन्य वैध कानूनी दस्तावेजों तथा उनसे उत्पन्न अधिकारों की स्थिति स्पष्ट की जाए और आवश्यक संक्रमणकालीन एवं संरक्षण संबंधी प्रावधान किए जाएँ।
9. मुस्लिम समाज से व्यापक एवं वास्तविक परामर्श किया जाए
मुस्लिम समाज से संबंधित किसी भी महत्वपूर्ण प्रावधान को अंतिम रूप देने से पहले उलेमा/धर्मगुरुओं, मुस्लिम पर्सनल लॉ के विशेषज्ञों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, महिलाओं के प्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों से औपचारिक एवं सार्थक परामर्श किया जाए। लिखित सुझाव एवं आपत्तियाँ प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
10. प्रस्तावित UCC का पूरा मसौदा सार्वजनिक किए बिना अंतिम निर्णय न लिया जाए
UCC का पूरा और स्पष्ट मसौदा सार्वजनिक किया जाए तथा उसके बाद पर्याप्त समय देकर सुझाव एवं आपत्तियाँ आमंत्रित की जाएँ। व्यापक जनपरामर्श, विशेषज्ञ समीक्षा और आवश्यक संवैधानिक एवं कानूनी परीक्षण पूरा किए बिना UCC से संबंधित किसी कानून को जल्दबाजी में लागू न किया जाए।
TNRAT का संवैधानिक पक्ष
TNRAT भारत के संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान करता है। हम संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित UCC संबंधी संवैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह मांग करते हैं कि किसी भी प्रस्तावित UCC का निर्माण और क्रियान्वयन संविधान के मौलिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, समानता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं गरिमा तथा अन्य संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हो।
TNRAT किसी कानून का विरोध मात्र करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रक्रिया, पारदर्शिता, व्यापक जनपरामर्श और मुस्लिम समाज से सार्थक संवाद सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ये मांगें प्रस्तुत करता है।
TNRAT की स्पष्ट मांग
“अनुच्छेद 44 के तहत UCC की दिशा में आगे बढ़ते समय संविधान के मौलिक अधिकारों और अन्य संबंधित संवैधानिक प्रावधानों का पूर्ण सम्मान किया जाए तथा मुस्लिम समाज से संबंधित विषयों पर उसके प्रतिनिधियों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।”





