रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) रायपुर कोर्ट में पेशी के लिए लाए गए तीन नाइजीरियाई आरोपियों को कोर्ट रूम के बाहर बिरयानी खिलाने के मामले में जज ने नाराजगी जताई है। जज ने मामले में मौजूद दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश रायपुर पुलिस कमिश्नर को दिए हैं।
दरअसल, तीनों आरोपी एक मामले में नियमित पेशी के लिए कोर्ट पहुंचे थे। पेशी के बाद उन्हें वापस जेल ले जाने की तैयारी थी। इसी दौरान कोर्ट के बाहर उनके परिजन उन्हें बिरयानी खिला रहे थे।
इसी दौरान जज अमित राठौर की नजर आरोपियों पर पड़ी। उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को कोर्ट रूम में बुलाया और दोनों के नाम नोट करवाए। जज ने पुलिसकर्मियों को न्यायिक हिरासत में बंद आरोपियों से जुड़े नियमों का पालन करने की हिदायत दी।
जज की नाराजगी के बाद मौके पर मौजूद वकीलों ने भी माफी मांगी। जज ने उन्हें समझाइश देते हुए कोर्ट की प्रक्रिया और न्यायिक हिरासत से जुड़े नियमों का पालन करने को कहा।
दूसरे कोर्ट में पेशी, PMLA कोर्ट के बाहर चल रही थी बिरयानी पार्टी
तीनों नाइजीरियन आरोपी नियमित पेशी के लिए रायपुर कोर्ट पहुंचे थे। पेशी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जाना था। इसी दौरान वे PMLA कोर्ट रूम के बाहर पहुंच गए, जहां उन्हें बिरयानी खिलाई जा रही थी।
आरोपियों के साथ उनके परिजन और वकील भी मौजूद थे। मौके पर पुलिसकर्मी भी थे। इसी दौरान PMLA स्पेशल जज अमित राठौर कोर्ट रूम से बाहर निकले। कुछ देर बाद जब वे वापस कोर्ट रूम में जा रहे थे, तब उन्होंने तीनों आरोपियों को बिरयानी खाते हुए देखा।
डर के कारण अंदर जाने में हिचकिचाए पुलिसकर्मी
आरोपियों को कोर्ट परिसर में खाना खिलाते देखकर जज ने नाराजगी जताई। उन्होंने मौके पर मौजूद 2 पुलिसकर्मियों को कोर्ट रूम में बुलाने के लिए कहा। जज की नाराजगी देखकर वहां मौजूद लोग सहम गए। इस दौरान जब पुलिसकर्मी अंदर नहीं पहुंचे तो कोर्ट रूम का स्टाफ उन्हें बुलाने के लिए बाहर गया। इसके बाद भी वे कोर्ट रूम के अंदर जाने से हिचकिचा रहे थे।
वकीलों ने मांगी माफी, जज ने दी समझाइश
पुलिसकर्मियों को कोर्ट रूम में अंदर बुलाए जाने के बाद भी वहां मौजूद आरोपियों के वकीलों ने जज से माफी मांगी। जज ने वकीलों को समझाइश दी और कोर्ट परिसर में न्यायिक हिरासत से जुड़े नियमों का पालन करने को कहा।
न्यायिक हिरासत वाले कैदियों को बिना अनुमति खाना नहीं खिला सकते
न्यायिक हिरासत में मौजूद आरोपियों को कोर्ट परिसर में किसी भी तरह की खाद्य सामग्री देने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और अनुमति का पालन करना होता है। ऐसे में कोर्ट की अनुमति के बिना आरोपियों को खाना खिलाने को लेकर सवाल उठे हैं। इसी मामले में कोर्ट ने संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।





