*आर्थिक रूप से कमज़ोर होने के नाते श्याम जी(पोपट लाल) का बचपन व किशोरावस्था बहुत संघर्षों में गुज़रा है,पढ़े पूरी रिपोर्ट।*

1993 को मुंबई में हुआ बम कांड इस बम कांड में उन सैकड़ों घायलों में श्याम के पिताजी भी शामिल थे, ऐसे में समय से पहले ही उनके पिता को अपनी जॉब से रिटायरमेंट लेना पड़ा जिसकी वज़ह से अपनी माँ के साथ मिलकर श्याम को ही सब कुछ सँभालना पड़ा।

सियासत दर्पण न्यूज़,वर्ष 2008 से लगातार सफलता पूर्वक चल रहा मशहूर टीवी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के ऐक्टर भी शो की तरह ही बेहद मशहूर हैं और सभी के चहेते भी हैं। इस शो के किरदारों को दर्शक उनके असल नाम से भले ही ना जानते हो लेकिन उनके किरदार हर किसी की ज़ुबान पर रहते हैं।
फिर चाहे वो जेठालाल हो, दयाबेन हो या शो के अन्य किरदार। इस शो में एक किरदार ऐसा भी है जो हमेशा अपनी शादी के लिए परेशान रहता है और जिसकी पहचान है उसका छाता। जी हाँ बिल्कुल ठीक पहचाना आपने उस किरदार का नाम पोपटलाल ही है और उस किरदार को अपनी नेचुरल ऐक्टिंग से जीवंत कर देने वाले ऐक्टर का नाम है श्याम पाठक।
उनका छाता लेकर चलने के स्टाइल, गुस्से में दुनिया हिला दूंगा कहने का अंदाज सब कुछ लोग खूब पंसद करते हैं। सालों से अपने जीवनसाथी की तलाश में भटकते पोपटलाल के इस दिलचस्प किरदार को निभाने वाले श्याम पाठक के जीवन से जुड़ी बातें भी बेहद दिलचस्प व प्रेरणादायक हैं।
पत्रकार पोपटलाल इस शो के सबसे ज्यादा पसंद किये जाने वाले कलाकार में से एक है। शो में पोपटलाल पिछले 13 साल से अपने जीवनसाथी के तलाश में है लेकिन अभी तक उनकी तलाश पूरी न हो सकी है। इसी जद्दो-जहद में उसके साथ कुछ ना कुछ घटना घट जाती है जिससे दर्शक हँसने पर मजबूर हो जाते हैं।
हालांकि कम लोगों को ही पता होगा कि ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के मूल उपन्यास का यह ओरिजिनल किरदार शराब भी पीता था और पान खाकर इधर उधर पीक मारता चलता था। लेकिन बच्चों के पसंदीदा इस शो के इस किरदार के साथ बदलाव किया गया ताकि समाज पर इसका कोई ग़लत असर न हो।
दोस्तों पोपटलाल के साथ-साथ इस किरदार को निभाने वाले ऐक्टर श्याम जी को आज देश के बच्चे बच्चे पहचानते हैं लेकिन उनके असल नाम की जगह सभी उनको पोपटलाल के नाम से ही जानना पसंद करते हैं।
12 जून 1976 को मुंबई के घाटकोपर इलाके के एक निम्न मध्यवर्गीय गुजराती परिवार में जन्मे श्याम जी का जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा घाटकोपर के एक चॉल में बीता है।
बचपन से ही पढ़ाई के साथ साथ श्याम को अभिनय का शौक़ था और वे ‘स्वाध्याय परिवार’ नाम की एक संस्था से जुड़कर उसमें आयोजित होने वाले बसंतोत्सव जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लिया करते और अभिनय के इस शौक़ को पूरा कर लिया करते थे।
कह सकते हैं कि उनके अंदर ऐक्टर का बनने की चाहत ने वहीं जन्म लिया था। दोस्तों आर्थिक रूप से कमज़ोर होने के नाते श्याम जी का बचपन व किशोरावस्था बहुत संघर्षों में गुज़रा है।
एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि अपने खर्च ख़ुद उठाने के लिये वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ पंजाबी शूट्स के एक शो रूम पर काम किया करते थे और अपनी कॉलेज तक की पढ़ाई उन्होंने ऐसे ही पूरी की हालांकि इस दौरान उन्होंने अपने थियेटर के शौक़ को भी ज़िन्दा रखा।
श्याम बताते हैं कि उनके परिवार की सात पुश्तों में किसी ने ऐक्टिंग नहीं कि है ऐसे में जब वे अपने थियेटर और ऐक्टिंग के शौक़ के बारे में घर में या दोस्तों से बताते तो सभी उनपे हँसते और कहते कि ये पागल हो गया है।
जीवन के इन संघर्षों और अपने सपनों की उड़ान के बीच श्याम ने पोस्ट ग्रेजुएशन में भी ऐडमिशन ले लिया, लेकिन तभी उनके जीवन में कुछ ऐसा हादसा हुआ जिसने उनकी उड़ान से पहले ही उनके परों को काट दिया और उनके परिवार की काफी हद तक ज़िम्मेदारी उनके नाज़ुक कंधों पर आ गयी।
दोस्तों आपको 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुआ बम कांड तो याद ही होगा इस कांड में मुंबई में सिलसिलेवार 12 जगहों पर हुए धमाकों में 257 लोग मारे गए थे और 713 लोग घायल हुए थे। इस बम कांड में उन सैकड़ों घायलों में श्याम के पिताजी भी शामिल थे, ऐसे में समय से पहले ही उनके पिता को अपनी जॉब से रिटायरमेंट लेना पड़ा जिसकी वज़ह से अपनी माँ के साथ मिलकर श्याम को ही सब कुछ सँभालना पड़ा।
श्याम ने अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई तो बीच में ही छोड़ दी लेकिन इस बीच वे नादिरा बब्बर जी के थियेटर ग्रुप ‘एकजुट’ से जुड़ गये और नियमित थियेटर करने लगे। कुछ सालों तक एकजुट में काम करने के बाद वे मशहूर रंगकर्मी बैरी जॉन के ग्रुप से जुड़ गये। बैरी जॉन जी के बारे में हम एक बात याद दिला दें कि ये वही शख़्सियत हैं जिनसे मनोज बाजपेयी और शाहरुख ख़ान जैसे दिग्गज थियेटर आर्टिस्ट ने भी ऐक्टिंग सीखा है।
दोस्तों कम लोगों को ही पता होगा कि अपने शानदार अभिनय की बदौलत सभी के दिलो में अपनी जगह बनाने वाले श्याम पाठक दरअसल कभी एक चार्टेड अकाउंटेंट बनना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया में ऐडमिशन भी लिया था।
दरअसल ये चाहत श्याम जी से कहीं ज़्यादा उनकी माँ की थी इसलिए श्याम जी ने थियेटर से जुड़ाव के बावज़ूद भी चार्टेड अकाउंटेंट यानि सी ए की पढ़ाई में मन लगाना शुरू कर दिया, लेकिन फाइनल इक्ज़ाम से थोड़ा पहले उन्हें ऐसा महसूस होने लगा कि वे सिर्फ़ और सिर्फ़ ऐक्टिंग करने के लिये ही बने हैं।
बस फिर क्या था उन्होंने हिम्मत करके अपने दिल की बात घर में बता दी। हालांकि बहुत लोगों को लगा कि ये ग़लत फ़ैसला है लेकिन तब तक श्याम पूरी तरह से ठान चुके थे कि वे विधिवत ट्रेनिंग लेके ऐक्टिंग के फील्ड में ही अपना करियर बनायेंगे।
उन्होंने लोगों की बातों की परवाह न करते हुए अपने सी ए की पढ़ाई बीच में छोड़ नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में अप्लाई कर दिया और मज़े की बात कि उनके पहले ही प्रयास में उन्हें एडमिशन मिल भी गया जो कि एक बहुत बड़ी बात थी।
कम लोगों को ही पता होगा कि तारक मेहता का उल्टा चश्मा में पोपटलाल पांडे का किरदार निभाने वाले श्याम पाठक ने शो से पहले एक इंटरनेशनल प्रोडक्शन में काम किया था और वो भी एक चीनी फिल्म में।
श्याम की उस फिल्म ‘लस्ट कॉशन’ का एक पुराना वीडियो क्लिप यूट्यूब पर काफी वायरल हुआ था जब उन्होंने सोशल मीडिया पर उस वीडियो क्लिप को साझा किया था उस सीन में उनके साथ अभिनेता अनुपम खेर भी हैं।
एंग ली द्वारा निर्देशित ‘लस्ट कॉशन’ द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान शंघाई में बेस्ड एक सस्पेंस फ़िल्म है जो जापान के कब्जे के दौरान घटित घटनाओं पर आधारित थी। वर्ष 2007 में आई इस फिल्म में उन्होंने सोनार यानी जूलरी शॉपकीपर का रोल निभाया था।
तारक मेहता शो से पहले श्याम ने “हार्ल्स” जैसे कुछ विज्ञापनों और ‘जसुबेन जयंतीलाल जोशी की ज्वाइंट फैमिली’ और ‘सुख बाय चांस’ जैसे शोज में भी काम किया है, साथ ही वे 1997 में आयी फिल्म घूँघट में भी एक छोटी सी भूमिका में नज़र आये थे।
लेकिन उन्हें जो पहचान और प्रसिद्धी पोपटलाल के किरदार को निभा कर मिली है वो पहले कभी नहीं मिली थी। हालांकि इस जबरदस्त प्रसिद्धि के बावज़ूद एक वक्त ऐसा भी आया था जब श्याम को तारक मेहता शो से बाहर का रास्ता दिखाने की बात हो गयी थी।
दरअसल हुआ ये था कि साल 2017 में दिलीप जोशी एक लाइव शो के लिए लंदन गए थे जहाँ ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के कलाकारों को पसंद करने वालों की संख्या बहुत ही ज़्यादा है ऐसे में वहां लोगों ने दिलीप से रिक्वेस्ट की कि वो ‘पोपटलाल’ के साथ कोई एक्ट करें। उस वक्त श्याम मुंबई में थे।
दिलीप ने श्याम को तुरंत फोन किया और पूछा कि क्या वो लंदन में परफॉर्म करने आ सकते हैं? एक थियेटर आर्टिस्ट को थियेटर में काम करने का मौक़ा मिले तो भला वो ना कैसे कर सकता था, दिलीप की बात सुनकर श्याम बहुत खुश हुए और बिना देर किए लंदन के लिए रवाना हो गए लेकिन इस जोश में श्याम जी से एक ग़लती हो गयी, दरअसल लंदन जाने से पहले श्याम ने तारक मेहता शो के प्रोडक्शन हाउस को इसकी कोई जानकारी नहीं दी
और जब वहां से शो करके श्याम ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के सेट पर वापस आए तो उन्हें पता चला कि उन्हें शो से बाहर कर दिया गया है। बताया जाता है कि जब श्याम पाठक को पता चला कि उन्हें शो से बाहर कर दिया गया है तो वो काफी डर गए जो कि एक स्वाभाविक बात थी।
ख़बरों के मुताबिक लगभग 4 दिन तक उन्हें शो से बाहर रखा गया था, बाद में श्याम ने शो के प्रड्यूसर से माफी मांगी, और फिर उनकी शो में दोबारा वापसी हुई। हालांकि इसमें कोई शक़ नहीं कि जिस प्रकार श्याम के लिये यह शो कीमती है उसी तरह उनके बिना यह शो भी अधूरा है।
बात करें श्याम पाठक जी की निजी जीवन की तो शो में अविवाहित पुरुष की भूमिका निभाने वाले श्याम असल जिंदगी में ऐसे नहीं हैं। शो में वर्षों से अपनी शादी के लिये आज तक परेशान श्याम पाठक वर्ष 2003 में ही शादी कर चुके थे यानि इस शो से जुड़ने से पहले ही वे शादीशुदा थे।
श्याम जी की पत्नी का नाम रेशमी है और उन्होंने भी एन एस डी में उनके साथ ट्रेनिंग ली थी। केरला की रहने वाली रेशमी से उनकी दोस्ती प्यार में बदली और फिर उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया।
हालांकि बताया जाता है कि इस शादी में उन दोनों के ही परिवार की रज़ामंदी नहीं थी और एन एस डी की ट्रेनिंग ख़त्म होने के ठीक एक दिन पहले आर्य समाज मंदिर में हुई इस शादी में उनके कुछ साथी ही शामिल थे। मज़े की बात कि इस शादी का रिसेप्शन एन एस डी के ही ग्राउंड में रखा गया था। श्याम तीन बच्चों के पिता हैं जिनमें दो बेटे और एक बेटी है।

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