*पुरानी पेंशन बहाली व समयबद्ध पदोन्नति को लेकर 9 अप्रैल को पैरामिलिट्री परिवारों द्वारा राजघाट पर धरना प्रदर्शन रणबीर सिंह,,एलायंस महासचिव*

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सियासत दर्पण न्यूज़ छत्तीसगढ़

नई दिल्ली,, सियासत दर्पण न्यूज़,,11 लाख केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों के जवानों व अधिकारियों के पुरानी पेंशन बहाली व ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस दर्जे को लेकर एलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले बापू समाधि राजघाट पर 9 अप्रैल को विरोध प्रदर्शन करेंगे साथ ही सीआरपीएफ शौर्य दिवस के उपलक्ष्य में शूरवीरों के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया जायेगा।
एलायंस महासचिव रणबीर सिंह द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि पंजाब में लम्बे चले आतंकवाद, कश्मीर प्रॉक्सी वार या छत्तीसगढ़ नक्सलवाद को सीआरपीएफ बीएसएफ, आईटीबीपी व अन्य सुरक्षा बलों द्वारा सैकड़ों कुर्बानियां देकर जड़मूल से खत्म किया गया।

 


रणबीर सिंह द्वारा हाल ही मे माननीय गृह मंत्री जी के उस बयान की याद दिलाई जब उन्होंने 10 लाख जवानों द्वारा साढ़े 7 करोड़ पेड़ लगाने की बात कही, अब सरकार द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 23 मई 2025 सुनाए गए ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस दर्जे के खिलाफ संसद में सीएपीएफ जनरल एडमिनिस्ट्रेशन बिल 2026( black bill) पास कर हमारी जड़ काट कर सुनहरा भविष्य बर्बाद कर दिया। पैरा मिलिट्री जवानों की पुरानी पेंशन बहाली के हक में माननीय दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 11 जनवरी 2023 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया लेकिन अपने को राष्ट्रवादी कहने वाली सरकार ओपीएस जजमेंट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई ओर फैसले को अधर में लटका दिया। सुनने में आया कि अब सरकार सिपाहियों, निरीक्षकों व अधिकारियों के बीच फूट डालने वाली राजनीति कर रही है। इस काले बिल के खिलाफ व पुरानी पेंशन बहाली के मामले अधर मे लटकाने का असर आने वाले राज्य असम, बंगाल, केरला व तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में देखने को मिलेगा जहां लाखों की संख्या पैरामिलिट्री परिवार रहते हैं। पूर्व एडीजी श्री एचआर सिंह के कहे अनुसार केंद्रीय सरकार द्वारा लगातार किए जा रहे सौतेले व्यवहार से सुरक्षा बलों के लाखों परिवारों, रिटायर्ड अर्ध सैनिकों व वीरांगनाओं में भारी रोष व्याप्त है। एलायंस अध्यक्ष द्वारा दिल्ली एनसीआर व आस पास रहने वाले पैरामिलिट्री परिवारों, वीरांगनाओं से 9 अप्रैल को राजघाट पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन पर पहुंचने की अपील की जिनके चांद सरहदों की चौकस सुरक्षा व राज्यों के चुनावों में व्यस्त हैं।

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