महासमुंद।(सियासत दर्पण न्यूज़) मानव तस्करी की आड़ में गरीब मजदूर परिवारों को एडवांस रकम और कर्ज के जाल में फंसाकर दूसरे राज्यों के ईंट भट्ठों में भेजने के कथित नेटवर्क का पुलिस ने राजफाश किया है। मामले की जांच एक 15 वर्षीय नाबालिग के गर्भवती होने की सूचना से शुरू हुई। पुलिस के अनुसार नाबालिग को परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के ईंट भट्ठे पर भेजा गया था, जहां जेसीबी चालक द्वारा उसके दैहिक शोषण का आरोप सामने आया। जांच आगे बढ़ी तो महासमुंद और ओडिशा से दूसरे राज्यों तक मजदूरों को भेजने वाले कथित नेटवर्क की जानकारी सामने आई।
एक साथ 10 ठिकानों पर दबिश दी
पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, एएसपी सुशील नायक ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता में बताया कि मामले में महासमुंद जिले और ओडिशा में एक साथ 10 ठिकानों पर दबिश दी गई। कार्रवाई के दौरान 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नकद जब्त किए गए हैं। इसके अलावा मजदूर पलायन से संबंधित रजिस्टर-डायरी, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्टगेज स्टांप दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन सहित अन्य सामग्री बरामद की गई है। पुलिस ने पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
अस्पताल मेमो से शुरू हुई जांच
पुलिस के अनुसार एक अस्पताल मेमो के माध्यम से नाबालिग के शारीरिक शोषण और गर्भवती होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पूछताछ और जांच में कथित तौर पर सामने आया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पहले एडवांस रकम दी जाती थी। इसके बाद कर्ज चुकाने के नाम पर उन्हें दूसरे राज्यों के ईंट भट्ठों में काम करने के लिए भेजा जाता था।
पुलिस को आशंका है कि कई मामलों में मजदूरों पर तय अवधि तक काम करने का दबाव बनाया जाता था। नाबालिग भी परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के एक ईंट भट्ठे पर पहुंची थी। पुलिस के अनुसार वहां उससे उसकी उम्र और क्षमता के विपरीत मजदूरी कराई गई। इसी दौरान भट्ठे के जेसीबी चालक पर उसके शारीरिक शोषण का आरोप सामने आया। इस घटना की जांच करते हुए पुलिस कथित मानव तस्करी नेटवर्क तक पहुंची।
दस्तावेजों से जुड़ रही नेटवर्क की कड़ी
पुलिस ने बताया कि दबिश के दौरान मिले रजिस्टर और डायरियों में मजदूरों को दूसरे राज्यों में भेजने से संबंधित जानकारी मिली है। इन दस्तावेजों, मोबाइल फोन और बैंक खातों की जांच की जा रही है। पुलिस उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और गुजरात सहित अन्य राज्यों में मजदूरों की आवाजाही से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।
ये हुए गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपितों में मुकेश चंद्राकर निवासी बेलटुकरी, नसीम बानो उर्फ लता सबर निवासी खरियार रोड (दोनों ओडिशा), मनीष गुप्ता पिता जगत कुमार गुप्ता निवासी ब्राह्मणडीह, नंदकुमार मोहंती उर्फ नंदू और पीयूष अग्रवाल निवासी पिथौरा शामिल हैं। पुलिस के अनुसार थाना खल्लारी में अपराध क्रमांक 104/2026 दर्ज किया गया है। विवेचना के दौरान बीएनएस की धारा 111 के तहत संगठित अपराध का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
किसने दिया एडवांस, किसने भेजा मजदूर?
पुलिस अब आरोपितों के मोबाइल फोन, सीडीआर, बैंक खातों और बरामद दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच का दायरा इस बात पर केंद्रित है कि मजदूरों को किसने जोड़ा, एडवांस रकम किसने दी, उन्हें दूसरे राज्यों तक कौन पहुंचाता था और किन ईंट भट्ठों पर मजदूर भेजे गए। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कथित नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।






