Home / National / *दुनिया इन दिनों’ की संपादक स्वर्गीय सरिता सक्सेना की स्मृति में आयोजित एक आत्मीय और गरिमामय कार्यक्रम में आज ‘सरिता स्मृति अलंकरण’ की घोषणा की गई।*

*दुनिया इन दिनों’ की संपादक स्वर्गीय सरिता सक्सेना की स्मृति में आयोजित एक आत्मीय और गरिमामय कार्यक्रम में आज ‘सरिता स्मृति अलंकरण’ की घोषणा की गई।*

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सियासत दर्पण न्यूज़ से नाहिदा कुरैशी की रिपोर्ट

सरिता स्मृति समारोह आयोजित
सरिता स्मृति अलंकरण घोषित

भोपाल, सियासत दर्पण न्यूज़,दुष्यंत संग्रहालय भोपाल में आयोजित कार्यक्रम ‘सरिता स्मृति लोकार्पण’ प्रसंग में उनके द्वारा लिखे गए अग्रलेखों के संकलन का विमोचन प्रख्यात रंगकर्मी एवं अभिनेता राजीव वर्मा द्वारा किया गया। इस कृति का संपादन लेखक-कवि मोहन सगोरिया ने किया है। मंच पर वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल, पत्रकार डॉ राकेश दीक्षित, कथाकार हरि भटनागर, कवि-पत्रकार सुधीर सक्सेना और वरिष्ठ लेखक राजेंद्र कोठारी उपस्थित थे।

इस अवसर पर प्रधान संपादक ‘दुनिया इन दिनों’ डॉ. सुधीर सक्सेना ने ‘सरिता स्मृति अलंकरण’ के शुभारंभ की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह अलंकरण साहित्य-संस्कृति ही नहीं वरन् विज्ञान, खेल, संगीत, पर्यावरण, पत्रकारिता, फिल्म और थिएटर के साथ अन्य विधाओं में भी प्रदान किया जाएगा । अलंकरण समारोह प्रथम वर्ष में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित होगा क्योंकि रायपुर सरिता सक्सेना की जन्मभूमि है। तत्पश्चात यह श्रृंखला देश भर में चलाई जाएगी। अलंकरण देने लिए व्यक्ति का चुनाव जूरी द्वारा किया जाएगा। इस जूरी में वरिष्ठ लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता रघुराज सिंह भोपाल, वरिष्ठ मीडियाकर्मी एवं पत्रकार राजेश बादल भोपाल, वरिष्ठ पत्रकार पुष्परंजन दिल्ली और पत्रकार कुमुद जैन हैदराबाद सम्मिलित होंगे।

पत्रकार-संपादक सरिता सक्सेना की स्मृति में हुए इस भव्य आयोजन में युवा संगीतकार अजय मिश्रा और रामेश्वर बंसल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के गीतों की सांगीतिक प्रस्तुति दी। सरिता सक्सेना की पत्रकारिता के क्षेत्र में अवदान को रेखांकित करते हुए मंचासीन अतिथियों ने तथा आगंतुकों ने उन्हें महिला पत्रकारों की श्रेणी में अग्र पंक्ति में रखा। मंच से रेखांकित किया गया कि सरिता सक्सेना बगैर किसी लोकप्रियता के लालच से निष्पृह रहकर शांत और चुपचाप अपना कार्य करने वाली महत्वपूर्ण संपादक थीं। उन्होंने अपने कार्यकाल में समकालीन विषयों पर बेबाकी से अपनी क़लम चलाई। वे देश, देशज और देशांतर मुद्दों पर प्राथमिक तौर पर लिखती थीं। उनके संपादकीय लेख आज भी प्रासंगिक है।

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